दरभंगा के केवटी से भाजपा विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मैथिली भाषा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत के कारण शास्त्रीय भाषा के सभी मापदंडों को पूरा करती है।
भाजपा विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मैथिली भाषा का इतिहास 14वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है और यह भाषा न केवल भारत बल्कि नेपाल के भी बड़े हिस्सों में बोली जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि मैथिली से कई अन्य भाषाओं का उद्भव हुआ है, जो इसकी पुरातनता और प्रभाव को दर्शाता है। अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में मैथिली को भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल किया गया था। लेकिन इसे बीपीएससी परीक्षाओं से बाद में हटा दिया गया, जिससे भाषा प्रेमियों में निराशा फैल गई थी।
शास्त्रीय भाषा का दर्जा क्यों जरूरी?
मुरारी मोहन झा ने तर्क दिया कि मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से न केवल इसके भाषाई और सांस्कृतिक संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में भी वृद्धि होगी। शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से शिक्षा और मीडिया जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम मैथिली भाषा के लिए सम्मान और गौरव का प्रतीक होगा और इससे इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी।
सरकार से कार्रवाई की अपील
विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने बताया कि केंद्र सरकार को पहले ही मैथिली को शास्त्रीय दर्जा देने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार सरकार से अपील की कि भाषा और साहित्य के विकास को लेकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि मैथिली का गौरव और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षित रह सके।