बिहार में बाढ़ की समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सोमवार को दरभंगा जिले के किरतपुर प्रखंड के तेतरी गांव के पास पश्चिमी कोशी तटबंध के टूटे हुए स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि बाढ़ की तबाही को रोकने के लिए ढेंग, तैयबपुर, अरेराज और डगमारा में चार नए बैराज का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना 11,500 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी, जो बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के रूप में काम करेगी।
मंत्री ने कहा कि बाढ़ रोकथाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शीर्ष प्राथमिकता है। इस साल कोशी नदी में पिछले 56 वर्षों का सबसे ज्यादा जलस्राव हुआ, जिसके बावजूद विभाग की सतर्कता से भारी तबाही को रोका जा सका। हालांकि, तटबंधों के जिन हिस्सों पर ओवर-टॉपिंग (तटबंध के ऊपर से पानी का प्रवाह) हुई, वहां तटबंधों का उच्चीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
बाढ़ समाधान की दिशा में बैराज निर्माण
चौधरी ने जानकारी दी कि बैराजों के निर्माण से बाढ़ का असर काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा, नेपाल में हाईडैम के निर्माण की भी जरूरत है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय समाधान से जुड़ा मामला है। गाद (नदियों में जमा हो रही मिट्टी) की समस्या को भी सरकार गंभीरता से देख रही है, जिसके समाधान के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकता है।
तटबंधों की स्थिति और सुधार कार्य
तेतरी गांव में टूटे तटबंध का निरीक्षण करते हुए मंत्री ने बताया कि क्षतिग्रस्त तटबंध के दोनों छोरों (कट-इंड) को सुरक्षित कर लिया गया है और जलस्तर कम होने पर टूटान को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। विभाग की तत्परता से तटबंध के टूटे हुए हिस्से से निकली कोशी नदी का प्रवाह कमला बलान नदी में मिलकर वापस कोशी में समाहित हो रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत मिलने लगी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य
मंत्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि राज्य सरकार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार है। राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी हुई है। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाई जा रही है।
रिकॉर्ड जलस्राव से उत्पन्न संकट
जानकारी के मुताबिक, 27 से 29 सितंबर के बीच नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद कोशी, गंडक, बागमती और महानंदा सहित कई नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ा। 29 सितंबर को कोशी बैराज वीरपुर से रिकॉर्ड 6.61 लाख क्यूसेक जलश्राव प्रवाहित हुआ, जिसने पश्चिमी कोशी तटबंध के कई हिस्सों में ओवर-टॉपिंग की स्थिति पैदा की और तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, विभाग के युद्धस्तरीय संघर्षात्मक कार्यों ने इस स्थिति को नियंत्रित कर लिया।