सोननदी के बालू पर भी फैला था व्यवसाय
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किस्मत के भी हैं धनी
राधा चरण सेठ के संबंध में भोजपुर जिला के लोग कहते हैं कि किस्मत हो तो राधा चरण जैसा। मिठाई की दुकान चलाते-चलाते राधा चरण सेठ होटल के मालिक बन गए। वह यहीं नहीं रुके। इसके बाद वह जमीन और रियल एस्टेट का कारोबार करने लगे जिसमें उन्हें काफी मुनाफ़ा हुआ। जमीन और रियल एस्टेट के बाद उन्होंने अपनी किस्मत आजमाने के लिए बालू के धंधे में भी हाथ डाला, जहां किस्मत ने वहां भी उनका पूरा साथ दिया। अब उन्होंने बालू के ठेके का आवंटन करना शुरू कर दिया जहां किस्मत ने उनको अगाध संपत्ति का मालिक बना दिया। बालू की ठेकेदारी करते-करते राधा चरण साह की गिनती अब शहर के ख़ास रईसों में की जाने लगी।
मीठे बोल के सामने फीके पड़े बालू के बाहुबली
स्थानीय लोगों का कहना है कि रियल एस्टेट और बालू के कारोबार में बाहुबलियों का ही दबदबा होता है लेकिन राधा चरण सेठ ने इस परिपाटी को गलत साबित कर दिया था। उन्होंने सिर्फ अपनी मीठी बोली की वजह से बाहुबलियों पर भी हावी रहे और इसी का परिणाम था कि बालू के कारोबार में भी वह सबसे आगे रहे। भोजपुर का सोन नदी बालू के लिए मशहूर है। राधा चरण साह अपने व्यवहार और अगाध रुपयों की वजह से बालू सिंडिकेट से जुड़े। बालू के व्यवसाय में प्रवेश करते ही बालू के बड़े सिंडिकेट में उन्होंने अपनी जगह बना ली। फिर उन्होंने भोजपुर के कोईलवर, बिहटा के परेव पटना, औरंगाबाद और गया के बड़े बड़े बालू माफियाओं के साथ बेहतर संबंध बनाये।
राजद के रास्ते राजनीति में किया था प्रवेश
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मीठे बोल ने राधा चरण को बनाया "सेठ जी"
स्थानीय लोगों का कहना है कि राधा चरण में एक बहुत अच्छी बात है कि वह कभी गुस्से में या किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं करते थे। राधा चरण के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि वह हमेशा लोगों से बहुत प्रेम से बात करते थे चाहे मामला कितना ही गंभीर हो वह कभी क्रोधित नहीं होते थे। यही वजह है कि उनके इसी मिलनसार व्यवहार की वजह से लोग उन्हें प्रेम भाव से "सेठ जी" कहने लगे।
यहां से शुरू हुआ राजनैतिक सफ़र
2010 के आसपास उनके लालू प्रसाद यादव से बहुत अच्छे संबंध थे। इनका लालू परिवार में आना जाना लगा रहता था। इसी वजह से राधा चरण साह ने 2015 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें राजद का टिकट देकर आरा-बक्सर सीट से एमएलसी का चुनाव लड़वाया जहां इनकी किस्मत ने एक बार फिर इनका साथ दिया और इन्होंने भोजपुर-रोहतास के बाहुबली विधायक सुनील पाण्डेय के भाई और राजग गठबंधन के प्रत्याशी हुलास पाण्डेय को 329 वोट से पटखनी देकर पहली बार राजनीति का स्वाद चखा। हालांकि बाद में इन्होंने पार्टी बदल लिया और अब वह जदयू के हो गये। फिर 2022 में वह जदयू समर्थित एनडीए के उम्मीदवार बने और उन्होंने राजद समर्थित उम्मीदवार अनिल सम्राट को हराकर दूसरी बार विधान परिषद पहुंचे। अब सेठ जी की का कद भोजपुर के प्रतिष्ठित नेताओं में शुमार हो गया था।
पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह से थे अच्छे संबंध
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पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह से थे अच्छे संबंध
राधा चरण साह राजनीति में उतरने के बाद अपने संबंध बढाने लगे और देखते ही देखते इनका बड़े कद वाले नेताओं के साथ बहुत अच्छे संबंध बन गये थे। यही वजह है कि पहली बार एमएलसी बनने के बाद वह राजद के वरीय नेता और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के काफी नजदीकी हो गये। प्रभुनाथ सिंह और उनके बेटे के चुनाव में उनको बुलाते थे जहां जाकर राधाचरण सेठ अपने समाज का वोट ट्रांसफर करवाते थे।
बिहार मंत्री विजय चौधरी के साथ राधा चरण साह उर्फ सेठ जी
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बड़े बड़े नेताओं का है उनके घर पर आना जाना
राधाचरण सेठ भोजपुर के बड़े व्यवसायी के साथ साथ बड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पांच फरवरी को राधा चरण सेठ के बड़े बेटे कन्हैया साह की शादी की 25वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। बाईपास स्थित रिजॉर्ट में इसका आयोजन किया गया था, जिसमें राजनीतिक दलों के बड़े बड़े नेताओं से लेकर बड़े बड़े व्यापारी शामिल हुए थे।
विधान पार्षद सह जदयू के प्रदेश महासचिव राधा चरण साह उर्फ सेठ जी
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गिरफ्तारी से पहले क्या कहा सेठ जी ने
गिरफ्तारी से पहले राधाचरण सेठ कहते रहे हैं कि मैं मेहनत और ईमानदारी के बल पर यहां तक पहुंचा हूं। स्टेट बैंक, ग्रामीण बैंक, पीएनबी बैंक से हमने लोन लिया है। हमको नहीं समझ में आ रहा कि हमने कहां गड़बड़ी की है। फिलहाल आरा-बक्सर निकाय क्षेत्र से निर्वाचित विधान पार्षद सह जदयू के प्रदेश महासचिव राधा चरण साह उर्फ सेठ जी ईडी की गिरफ्त में हैं।