बांस घाट पर सेल्फी लेते लोग।
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जानिए, भगवान भास्कर को अर्घ्य देने का फल
सूर्य की पूजा मुख्य रूप से तीन समय विशेष लाभकारी होती है - प्रातः , मध्यान्ह और सायंकाल। प्रातःकाल सूर्य की आराधना स्वास्थ्य को बेहतर करती है। मध्यान्ह की आराधना नाम-यश देती है। सायंकाल की आराधना सम्पन्नता प्रदान करती है। अस्ताचलगामी सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं, जिनको अर्घ्य देना तुरंत प्रभावशाली होता है। जो लोग अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें प्रातःकाल की उपासना भी जरूर करनी चाहिए।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु।
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मुजफ्फरपुर के खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में भी कैदियों के लिए जेल प्रशासन ने छठ घाट बनाये हैं।
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छठ क्यों मनाते हैं?
वास्तविक रूप से इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे सकता। यह बिहार के सनातन हिंदू धर्मावलंबियों के घर-घर में होने वाला पर्व है। जो अपने घर में नहीं करते, वह दूसरों के घर में जाकर करते हैं। जो दूसरों के घर पर नहीं जाते, वह घाट पर जाकर अर्घ्य देते हैं। कोई मनोकामना के साथ करता है, कोई पूरा होने पर करता है तो बहुत सारे लोग यूं ही करते हैं आस्था के कारण। मनोकामना छठी मइया पूरी करती हैं और आस्था सूर्यदेव के प्रति दिखाते हैं।
छठ व्रतियों के लिए सड़के धोते लोग
पटना में सभी सड़कों को धो दिया गया गया। गंगा घाट तक जाने वाली सभी सड़कों को आज धोया जाता है। छठ समिति के लोग सड़कों की साफ-सफाई की जिम्मेवारी लेते हैं। जिस राह से छठ व्रती गुजरती हैं, उस राह को पानी से धोया जाता है।