इस मंदिर में 1964 से चैत्र नवरात्रि मनायी जा रही।
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सुपौल में वैदिक पद्धित से मां की पूजा
सुपौल नगर परिसद स्थित चकला निर्मली वार्ड 7 में चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना के साथ शुरू हो गई। चैती दुर्गा पूजा समिति चकला निर्मली सुपौल द्वारा इस बार बड़ी भव्यता के साथ पूरे आयोजन को करने की तैयारी है। पूजा समिति के सचिव जयंत मिश्रा ने बताया कि 1964 ई से इस ऐतिहासिक स्थल पर मूर्ति स्थापित कर भव्य रूप से पूजा अर्चना की जाती है। पूजा समिति के सचिव ने बताया कि आचार्य नूतन झा एवं बनारस से आए हुए विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक पद्धति से पूजा हो रही है। संकल्प के साथ ही पूरे 9 दिन 24 घंटा दुर्गा सप्तशती का पाठ मंदिर प्रांगण में आरंभ हो चुका है। मंदिर प्रांगण को इस बार भगवा रंग से रंग रोगन किया गया है। पंडाल में भी भगवा रंग ही दिया गया है। संध्या आरती आज से प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से होगी। इसमें बनारस से आए से आए हुए विद्वान पंडितों द्वारा भव्य आरती की जाएगी। इस बार 3 दिन यानी सप्तमी, अष्टमी एवं नवमीं तिथि को काशी विश्वनाथ के पंडितों द्वारा भव्य महाआरती की जाएगी। पूजा समिति द्वारा इस बार मेला मैदान में झूला मीना बाजार एवं कई तरह के स्टॉल लगाए जाएंगे। सुरक्षा के मद्देनजर आयोजन स्थल को CCTV कैमरा से लैश कर दिया गया है।
इस बन रहा महासंयोग
इस वर्ष मां का आगमन नौका पर है, जिसे सुख-समृद्धि कारक कहा जाता है। पंडितों की मानें तो इस बार तीन सर्वार्थ सिद्धि, तीन रवि योग, दो अमृत सिद्धि योग और गुरु पुष्य का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग 23, 27 और 30 मार्च को लगेगा। अमृत सिद्धि योग 27 व 30 मार्च को और रवि योग 24, 26 व 29 मार्च को लगेगा। नवरात्रि के अंतिम दिन श्री रामनवमी पर गुरु पुष्य योग का महासंयोग बन रहा है। चैत्र प्रतिपदा से ही नवसंवत्सर का प्रारंभ होता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने पृथ्वी की रचना की थी, इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस वर्ष के राजा बुध और मंत्री शुक्र ग्रह होंगे। इस कारण शिक्षा क्षेत्र में कई अवसर मिलेंगे और महिलाओं का भी विशेष उत्थान इस वर्ष दिखाई पड़ेगा।