सीवान में ट्रेन से उतारे गए विस्फोटक शनिवार की रात जलाए गए।
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20 किलो विस्फोटक थे। ग्वालियर से बरौनी आ रही ट्रेन में सीवान स्टेशन पर उतारे गए थे। उतारने के बाद करीब छह घंटे स्टेशन पर राजकीय रेल पुलिस थाने में पड़े रहे। ट्रेन या स्टेशन पर विस्फोट होता तो क्या होता? इस सवाल का जवाब सीवान के पक्वलिया में गुजरी नदी के पास वीरानी में धधकती इस आग को देखने वालों को मिल गया। तस्वीर या वीडियो से अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि धमाके रोकने के लिए विस्फोटकों को खोलकर जलाया गया तो भी बम निरोधक दस्ता 700 मीटर दूर खड़ा रहा। आग काफी देर तक धधकती रही। बीच-बीच में आवाज भी आई, हालांकि बंधन खुले होने के कारण धमाके नहीं हुए। 'अमर उजाला' ने सबसे पहले विस्फोटक मिलने की जानकारी सामने लाई थी।
72 घंटे में निष्क्रिय नहीं हुआ तो अनुमति लेकर जलाया
22 मार्च को ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस में शराब जांच के दरम्यान GRP टीम को विस्फोटक बरामद हुआ था। तीन घंटे गफलत में और फिर तीन घंटे पटना से बम निरोधक दस्ते के आने के इंतजार में यह विस्फोटक जीआरपी थाने में पड़े रहे। उसके बाद करीब ढाई घंटे की प्रक्रिया में एहतियात के साथ बम निरोधक दस्ते ने इसे स्टेशन से निकाला। तब बताया गया कि टीम इसे लेकर पटना निकल गई है, लेकिन अब सामने आ रहा है कि इसे सीवान में ही निष्क्रिय करने का 72 घंटे तक प्रयास किया जाता रहा। पहले 24 घंटे में निष्क्रिय नहीं कर पाने की स्थिति में पटना हाईकोर्ट से इसे जलाने की अनुमति का प्रयास शुरू किया गया।
अधिकारियों की देखरेख में जलाए गए विस्फोटक
जीआरपी, आरपीएफ और पटना हाई कोर्ट के आदेश पर आई स्पेशल टीम के साथ विशेषज्ञों ने इसे पक्वलिया में नदी किनारे वीरान इलाके में जाकर जलाया। इससे पहले कार्यपालक दंडाधिकारी रवि कुमार, थानाध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह और बम निरोधक दस्ता मुजफ्फरपुर की टीम ने विस्फोटक का निरीक्षण कर कागजी प्रक्रिया की। विस्फोटकों को जलाए जाने का वीडियो 'अमर उजाला’ को हासिल हो गया, हालांकि इस पूरी प्रकिया में कोई भी अधिकारी यह नहीं बता रहे कि अबतक की जांच में क्या निकला है।
5 सवालों का अब भी जवाब नहीं मिला
- यह विस्फोटक ट्रेन में कहां चढ़ाए गए थे?
- विस्फोटक किसके साथ यहां तक पहुंचे थे?
- विस्फोटक को कहां पर ले जाया जाना था?
- विस्फोटकों के लाने की मंशा क्या रही होगी?
- इन विस्फोटकों की वास्तविक क्षमता क्या है?