आसनसोल में शत्रु के सामने पवन सिंह।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुखालफत करने वाले बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा के लिए बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी भारतीय जनता पार्टी ने मुसीबत खड़ी कर दी है। इस मुसीबत को भोजपुरी फिल्म जगत का पावर स्टार कहा जाता है। हां, पवन सिंह। पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से भाजपा ने पहली सूची में ही टिकट दे दिया है। आसनसोल संसदीय सीट पर उप चुनाव अप्रैल 2022 में हुआ था, जिसमें ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा ने जीत हासिल की थी।
भाजपा को तीन लाख वोटों से हराया था शत्रु ने
बिहार की राजधानी पटना के वीआईपी सीट पटना साहिब का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा का जब बगावती तेवर के कारण टिकट कटा तो उन्होंने कुछ समय के लिए राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद को प्रसन्न करने की कोशिश की, लेकिन अंतिम फलाफल उन्हें तृणमूल कांग्रेस से प्राप्त हुआ। आसनसोल का प्रतिनिधित्व पहले बाबुल सुप्रियो कर रहे थे। फिलहाल शत्रुघ्न सिन्हा कर रहे हैं। उन्होंने अप्रैल 2020 के उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पॉल को करीब तीन लाख वोटों से हराया था। सिन्हा को साढ़े छह लाख वोट मिले थे, जबकि पॉल को साढ़े तीन लाख से संतोष करना पड़ा था।
ज्यादा कड़ा मुकाबला, सुप्रियो ने क्या लिखा
पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ बने विपक्षी गठबंधन की रही-सही एकता भी कायम रही तो भाजपा के लिए यह सीट आसान नहीं होगी। भाजपा प्रत्याशी को शत्रुघ्न के मुकाबले तीन लाख वोट कम आए थे, वह भी तब जबकि वामपंथी और कांग्रेसी प्रत्याशी ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। करीब दो साल पहले हुए उप चुनाव में शामिल तृणमूल, वामदल और कांग्रेस के वोट को मिलाकर विपक्षी एकता की ताकत देखें तो साढ़े सात लाख के मुकाबले भाजपा के खाते में साढ़े तीन लाख वोट हैं। ऐसे में संभव है कि तृणमूल शत्रुघ्न सिन्हा को इस सीट पर कायम रखे और पवन सिंह भाजपा के टिकट पर उन्हें 2022 के उपचुनाव के मुकाबले कड़ी टक्कर दें। पीएम मोदी की सरकार में केंद्र के मंत्री रहने के बाद तृणमूल गए बाबुल सुप्रियो ने पवन सिंह का नाम पक्का होने के बाद लिखा- "आसनसोल को पवन सिंह मुबारक हो"। संकेत समझना मुश्किल नहीं।