आरा में अपराधियों ने प्रोफेसर दंपति की सोमवार को कर दी थी हत्या।
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पोस्टमार्टम के बाद बेटियों ने निभाई रस्में
दोनों शवों के पोस्टमार्टम होने के बाद अंतिम संस्कार की रस्म निभाते हुए मृत प्रोफेसर दंपति की तीनों बेटी रक्षिता सिंह, हर्षिता सिंह और अंकिता सिंह ने मां-बाप के लिए बेटा का फर्ज निभाते हुए उनकी अर्थी को कंधा दिया। घर से एक साथ निकले पति-पत्नी के शव को देख पूरा माहौल गमगीन था। सैकड़ों लोगों ने इस शव यात्रा में शामिल होकर रिटायर्ड प्रोफेसर दंपति को श्रद्धांजलि दी। उसी मुहल्ला के रहने वाले बिजय सिंह ने कहा कि आज समाज में बेटा और बेटियों में अब कोई फर्क नहीं रह गया है। बेटियों को यह अधिकार भी मिलना चाहिए कि जिस तरह से मां-बाप की सेवा करती हैं, ठीक उसी तरह उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार में भी धर्म निभाने की आजादी मिले। प्रोफेसर महेंद्र सिंह खुद शिक्षित व्यक्ति थे और उनकी बेटियों ने अपने मां-बाप की अर्थी को कंधा देकर समाज के लिए प्रेरणादाक काम किया है। सोमवार की रात आरा के नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत कतीरा मोहल्ले में रिटायर्ड प्रोफेसर महेंद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पा सिंह की उनके घर में अज्ञात अपराधियों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी थी।
मेट्रो की तर्ज पर पॉश इलाके में हुआ था मर्डर
मेट्रो सिटी की तर्ज पर आरा के सबसे पॉश इलाके में रिटायर्ड प्रोफेसर दंपति की इस सनसनीखेज हत्या से पूरा शहर हतप्रभ है। प्रो. सिंह भाजपा के काफी पुराने और कद्दावर नेता भी थे। वह वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व डीन थे। उनकी पत्नी पुष्पा सिंह महिला कॉलेज से साइकोलॉजी की रिटायर्ड प्रोफेसर थीं। प्रो. महेंद्र सिंह मूल रूप से रोहतास जिले के नासरीगंज थाना अंतर्गत अग्नि गांव के निवासी थे। तीनों बेटियों की शादी के बाद दोनों बुजुर्ग आरा में अपने मकान में ही रहते थे।