बिहार के चुनावों में लोकतंत्र के विभिन्न रूप देखने को मिले, यहां हर कदम राजनीतिक दलों के बीच शब्दों की गरिमाएं गिरती दिखीं तो आदर्श आचार संहिता जैसे संवदेनशील मुद्दों को भी राजनीतिक दलों ने ताक पर रख दिया। लेकिन सियासतानों की इसी आपसी खींचतान में आम जनता ने लोकतंत्र की पूरी लाज रखी।
इसका ही परिणाम रहा कि शुरूआती चारों चरणों में वोटरों ने लोकतंत्र का महत्व समझते हुए जमकर मतदान तो किया ही अंतिम चरण में भी पूरी तन्मयता से अपनी जिम्मेदारी निभाई। गुरुवार को हुए पांचवे चरण में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई जिसे देखकर लोकतंत्र के रक्षकों का सीना चौड़ा हो जाए।
वाक्या था सहरसा जिले के सोनवर्षा का जहां एक पिता का शव घर में छोड़कर बेटे ने पहले मतदान का फर्ज निभाया और उसके बाद पिता के शव को मुखाग्नि देकर पुत्र का फर्ज अदा किया।