बिहार में भाजपा-जदयू का गठबंधन टूटने के बाद सत्ता में आई महागठबंधन सरकार में भी कथित तौर पर दरार की अटकलें सामने आ रही हैं। वहीं, इसी बीच राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन के छोटे घटक दलों ने जल्द से जल्द समन्वय समिति के गठन की मांग तेज कर दी है। इन छोटे घटक दलों में शामिल वाम दलों ने ये मांग विशेषरूप से की है।
दरअसल, राज्य में भाजपा-जदयू गठबंधन की सत्ता जाने के बाद बनाए गए महागठबंधन में शामिल राजद और जदयू के बीच दरार की बातें तब सामने आईं जब राजद के राज्य प्रमुख जगदानंद सिंह ने कहा कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव अगले साल नीतीश कुमार की जगह लेंगे। वहीं, उनके बेटे सुधाकर ने अपनी ही सरकार को बार-बार कटघरे में खड़ा करने के कारण कृषि मंत्री का पद खो दिया है। हालांकि इसके बाद तेजस्वी यादव ने इसे लेकर प्रतिक्रिया देकर मामले को शांत करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें सीएम बनने की जल्दबाजी नहीं थी। इसके साथ ही उन्होंने जगदानंद सिंह को एक नोटिस जारी करते हुए राजद कार्यकर्ताओं को कोई भी बयान देने से मना किया था। वहीं, जगदानंद सिंह के इस बयान के बाद कहा जा रहा है कि नए गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है।
राजद और जदयू के बीच सब कुछ ठीक ना होने की अटकलों के बीच, महागठबंधन के छोटे सहयोगी दलों विशेष रूप से वाम दलों का कहना है कि यह उचित समय है कि एक समन्वय समिति बनाई जाए। जो सभी दलों में तालमेल बना कर रखे। सीपीआईएमएल (एल) के विधायक दल के नेता महबूब आलम ने इस बाबत जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि हमने सुधाकर सिंह के इस्तीफे के तुरंत बाद डिप्टी सीएम से एक समन्वय समिति के गठन की मांग के साथ मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि हमने सरकार के गठन के तुरंत बाद एक समन्वय समिति के गठन और एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इस समिति के गठन की आवश्यकता मजबूत हुई है।
माकपा नेता महबूब आलम ने दावा किया कि तेजस्वी यादव ने उनकी मांग पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। आलम ने बताया कि तेजस्वी यादव ने उन प्रतिनिधियों के नाम की लिस्ट बना कर लाने को कहा है जिन्हें माकपा समन्वय समिति का हिस्सा बनाना चाहेगी। गौरतलब है कि जद (यू), राजद और सीपीआईएमएल (एल) के अलावा महागठबंधन में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम) और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की एचएएम शामिल हैं।
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान ने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद समन्वय समिति के शीघ्र गठन की आवश्यकता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने शुरुआत में ही मांग उठाई थी। अंजान ने यह भी कहा कि मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को देखते हुए ऐसी समिति का गठन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उपचुनाव बहुदलीय गठबंधन के लिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का एक अवसर होगा।