पांच सांसदों के निर्णय के बाद लोजपा में बड़े घमासान की आशंका है। लोजपा के कई नेता पहले ही जेडीयू में शामिल हो चुके हैं। यह सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं चिराग पासवान पार्टी के रूठे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं। देर रात तक कड़ी मशक्कत जारी रही। पिछली बार सांसदों ने चिराग की बात मान ली थी, लेकिन इस बार वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
जेडीयू सांसद के संपर्क में थे पारस
पशुपति कुमार पारस पिछले कुछ दिनों से लगातार जेडीयू सांसद ललन सिंह के संपर्क में थे। हाल में ही पटना में दोनों के बीच मुलाकात भी हुई थी। दिल्ली में भी इनके बीच लगातार बातचीत होती रही है। सांसदों के साथ भी उनका संपर्क बना हुआ था। सूरजभान ललन सिंह के करीबी भी रहे हैं।
बागी नेताओं ने पारस को क्यों चुना नेता?
पारस लोजपा सांसदों में सबसे वरिष्ठ हैं। बड़ी बात ये है कि वे रामविलास पासवान के छोटे भाई हैं। वे सबको साथ लेकर चल सकते हैं। उनके नेता होने से किसी अन्य सांसदों को भी असहज महसूस नहीं होगा।
लोजपा के इकलौते विधायक ने भी थामा जेडीयू का दामन
बिहार विधानसभा चुनाव में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली लोजपा महज एक सीट जीत पाई थी। महिटानी के जीतकर आए लोजपा के इकलौते विधायक को भी चिराग पासवान अपनी पार्टी में नहीं रख पाए और वह जेडीयू में शामिल हो गए। इसके पहले, चुनाव परिणाम के बाद कई जिलाध्यक्ष समेत दो सौ से ज्यादा नेता लोजपा छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए थे।
राजनीति में पासवान परिवार की एकता की मिसाल दी जाती थी। रामविलास पासवान, पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान तीनों भाईयों में अगाध प्रेम अक्सर चर्चा का विषय रहता था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि जब भी तीनों भाई जुटते हैं, तो साथ ही खाना खाते हैं। कोई भी फैसला सामूहिक रूप से लेते हैं।
वर्ष 2019 में रामविलास चुनाव नहीं लड़े तो अपनी हाजीपुर की सीट पारस को ही सौंपी थी। रामचंद्र पासवान का निधन हुआ तो समस्तीपुर से भतीते प्रिंस राज को लड़ाया था। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया, लेकिन रामविलास पासवान के निधन के बाद चाचा-भतीजे में नीतीश के सवाल पर मनमुटाव शुरू हो गया। चिराग, नीतीश के धुर आलोचक और पारस प्रशंसक बने रहे। यहां बता दें कि पारस, नीतीश कैबिनेट में पशुपालन मंत्री थे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश के सवाल पर चाचा-भतीजे में मनमुटाव संवादहीनता के स्तर तक पहुंच गया और परिवार टूट गया।
केंद्र सरकार में शामिल हो सकते हैं पशुपति पारस
इन दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज है। पारस केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। वर्ष 2019 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने दोबारा कमान संभाली, तब एक फार्मूला बना कि सहयोगी दलों को मंत्रिपरिषद में एक-एक सीट दी जाएगी। तब 16 सांसदों वाली जेडीयू मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं हुई। उसकी कम से कम दो सीटों की मांग थी। 6 सांसदों वाली लोजपा से रामविलास पासवान मंत्री बने। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उनका निधन हो गया। लोजपा का कोटा खाली हुआ तो अभी तक भरा नहीं गया।