Bihar News : बेगूसराय में दारोगा की कुचलकर हत्या के करीब एक महीने पहले जमुई में एक दारोगा की इसी तरह हत्या हुई थी। इसका मुख्य आरोपी पुलिस को छकाता रहा। पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी। घर के कुर्की की तैयारी होने लगी, तब जाकर उसने समर्पण किया।
बिहार में पुलिस पर हमले इन दिनों खूब हो रहे हैं। पुलिस को जहां-तहां पीटे जाने या पत्थर मारकर घायल किए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं। शराब तस्करों और अवैध बालू खनन के माफिया सीधे जान लेने पर उतारू हैं। दारोगा की बेगूसराय में जैसे हत्या हुई, उसी तरह जमुई में भी हुई थी। जमुई में 14 नवंबर को अपर थानाध्यक्ष प्रभात रंजन को उस वक्त ट्रैक्टर से रौंद डाला था, जब वह अवैध खनन को रोकने का प्रयास कर रहे थे। मौके पर ही प्रभात रंजन की मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल होमगार्ड जवान राजेश कुमार साह अब भी इलाजरत है। घटना के 10 दिन बाद दारोगा प्रभात रंजन हत्याकांड मामले के मुख्य आरोपित कृष्णा दास ने 24 नवंबर को जमुई कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। पुलिस रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर चुकी है।
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पुलिस को भनक नहीं लगी, खुद समर्पण किया
आत्मसमर्पण से पहले कृष्णा दास की गिरफ्तारी के लिए पुलिस बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर रही थी, लेकिन वह चकमा देने में कामयाब रहा। इस बीच छापेमारी के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने के मामले में कृष्णा दास के माता-पिता और पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद भी वह गिरफ्त में नहीं आया। जब पुलिस ने कृष्णा दास के घर की कुर्की-जब्ती की कार्रवाई के लिए कोर्ट में अर्जी दी तो पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए वह कोर्ट पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। कृष्णा दास के कोर्ट पहुंचने की भनक तक पुलिस को नहीं लग सकी।