बिहार में विधानसभा चुनाव के शुरूआती चार चरणों में असली टक्कर लालू नीतीश के महागठबंधन और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के बीच ही रही है लेकिन पांचवे चरण में मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है।
यहां एनडीए और महागठबंधन के अलावा मुकाबले में कुछ और भी बड़े खिलाड़ी ताल ठोंकते नजर आ रहे हैं। बिहार के इस सीमांचल इलाके में इन दलों के प्रदर्शन पर बिहार ही नहीं देश वासियों की निगाहें भी टिकी हुई हैं।
इनमें सबसे खास तो ओवैसी की एआईएमआईएम और पप्पू यादव के जन अधिकार मोर्चा हैं। सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे एमआईएम सुप्रीमो ओवैसी ने छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
छह सीटों पर लड़ रहे हैं ओवैसी के उम्मीदवार
जिसमें रानीगंज सीट से अमित पासवान, किशनगंज से तसीरूद्दीन, कोचायधामन से अख्तारूल इमान, अमौर से नवाजिश आलम, वायसी विधानसभा सीट से गुलाम सरवर और बलरामपुर से मो आदिल ओवैसी की पार्टी के दम पर ताल ठोंक रहे हैं।
चुनाव से पहले सीमांचल की दो दर्जन सीटों पर लड़ने की घोषणा करने वाले ओवैसी ने ऐन टाइम पर छह सीटों पर ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया। ऐसे में अगर ओवैसी इन छह सीटों पर भी अपना वजूद न दिखा सके तो आने वाले समय में यूपी कूच करने की उनकी बहूप्रतिशिक्षित योजना खटाई में पड़ सकती है।
वहीं कभी मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव के लिए भी पांचवा चरण बहुत अहम है। पांचवे चरण में जिन सीटों पर चुनाव होना है उनमें कोसी क्षेत्र भी है। भी बाहुबली के तौर पर पहचान बनाने वाले पप्पू यादव ने कोसी को ही अपनी कर्मभूमि बनाया।
कोसी क्षेत्र में पप्पू यादव के सामने मुश्किल चुनौती
हालांकि फिलहाल वह मधेपुरा से सांसद हैं लेकिन कोसी में उनकी मजबूत पकड़ है। बिहार में पप्पू यादव ही अकेले ऐसे नेता हैं जो लालू यादव के बाद यादव वोटों पर दावेदारी कर सकते हैं।
लालू की तरह पप्पू यादव की भी यादव वोटों पर मजबूत पकड़ है। लालू यादव से अलग होने के बाद उन्होंने अपना वजूद और बढ़ा लिया है। कोसी के सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया और पूर्णिया आदि जिले पप्पू यादव की मजबूत पकड़ वाले हैं।
पप्पू यादव के सामने बड़ी समस्या ये भी है जिस हनक के साथ उन्होंने लालू यादव का साथ छोड़ा था उसे बरकरार रखने के लिए उन्हें इन जिलों में प्रभाव भी दिखाना होगा। अगर वह अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सफल नहीं होते हैं तो उनका राजनीतिक वर्चस्व और वजूद भी खतरे में पड़ जाएगा।