गुरु रहमान के साथ मानवी मधुकश्यप
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बिहार में अब महिला और पुरुषों के साथ थानों में ट्रांसजेंडर दारोगा भी नजर आयेंगे, क्यों कि तीन ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों ने सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में सफलता हासिल किया है। उन तीन अभ्यर्थियों में एक बांका जिला की मानवी मधु कश्यप (महिला ट्रांसजेंडर), दूसरा सीतामढ़ी के रोनित झा और मधुबनी जिला के बंटी कुमार हैं। रोनित और बंटी पुरुष ट्रांसजेंडर हैं।
दारोगा बने तीनों ट्रांसजेंडर हैं रहमान गुरु के शिष्य
बिहार पुलिस में एसआई के 1275 पदों पर ली गयी परीक्षा का अंतिम परिणाम मंगलवार को जारी हुआ, जिसमें 822 पुरुष, 450 महिला के साथ तीन ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ है। इस संबंध में मानवी मधु कश्यप ने कहा कि मेरी इस सफलता के लिए मैं अपने गुरुदेव गुरु रहमान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देती हूं। बिहार पुलिस में अब तीनों ट्रांसजेंडर दारोगा के रूप में अपनी सेवा देंगे।
मानवी मधु कश्यप कला की हैं शौक़ीन
मानवी मधु कश्यप मूल रूप से बांका जिले के पंजवारा बाजार निवासी स्वर्गीय नरेन्द्र प्रसाद उर्फ़ नटवर सिंह की पुत्री हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मानवी मधू कश्यप के बचपन का नाम मोनू सिंह था। ग्रामीण और उनके दोस्तों का कहना है कि मोनू सिंह बचपन से ही देखने में बहुत खूबसूरत थे। स्कूल में पढ़ने के दौरान ही उसमें लड़कियों के गुण आने लग गये थे। उन्हें कला से बहुत प्रेम था। गांव में दुर्गा पूजा के अवसर पर नाटक में वह महिला का किरदार निभाने लगे। उनके कलाकारी की खूब प्रशंसा होती थी। मोनू में पढ़ने की और कुछ बनने की ललक बचपन से ही थी। उन्होंने उच्च विद्यालय पंजवरा से मैट्रिक किया। फिर सी एन कॉलेज से इंटर और स्नातक किया।
काफी संघर्ष करने के बाद हासिल हुआ यह मुकाम
मानवी मधु कश्यप के ग्रामीणों का कहना है कि मोनू सिंह के एक्टिविटी में जब परिवर्तन होने लगा तब आसपास के लोगों का उनके प्रति नजरिया भी बदलने लगा। ग्रामीण परिवेश के बदलते माहौल में धीरे धीरे मोनू सिंह की परेशानी बढने लगी। पढ़ने के लिए रुपयों का होना बहुत जरूरी था। हालांकि इनके घर वालों खासकर इनकी मां माला देवी इनकी काफी मदद करती लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। ऐसे में वह अपनी बहन के यहां आसनसोल आ गई। ग्रामीणों के अनुसार मोनू सिंह हरने का नहीं बल्कि संघर्ष करने का नाम था। इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई को पूरा करने के लिए उन्होंने शोपिंग कॉम्प्लेक्स में भी काम किया। यहां तक कि उन्होंने पेपर वेंडर का भी काम किया। वहां तीन-चार साल रहने के बाद वह लगभग 2017-18 में उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया और जिंदगी में उंचाई हासिल करने के लिए पटना आकर पढ़ाई करने लगी।
गुरु रहमान को कहा -इनकी मदद से मिला यह मुकाम
2021 में गुरु रहमान ने अपने गुरुकुल की तरफ से लगभग आधा दर्जन थर्ड जेंडर विद्यार्थियों को नि:शुल्क पढ़ाने की घोषणा की। फिर मोनू सिंह उर्फ़ मानवी मधु कश्यप ने गुरु रहमान से मुलाकात की और फिर अपने कैरियर को बनाने के लिए वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गई। लगातार मेहनत और संघर्ष ने रंग लाया और आज वह बिहार दारोगा में अंतिम रूप से च्सयानित हुई। अब बहुत जल्द वह अपनी ट्रेनिंग को पूरा कर के बिहार पुलिस में अपना योगदान करेगी। उन्होंने गुरु रहमान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसके लिए धन्यवाद दिया।