बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से अबतक बार-बार सीटों की संख्या बदलती रही है।
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राजद के खेमे से चार निकले, खाते से नहीं
243 विधायकों का कागजी हिसाब जानने के बाद अब यह जानना रोचक है कि 12 फरवरी को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को विश्वास मत में हराने की तैयारी करने वाले महागठबंधन को जोर का झटका लगा था।
फ्लोर टेस्ट के समय तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के साथ खेला की आस लगाए बैठे थे, लेकिन गेम उलटा पड़ गया था। राजद के तीन विधायक चेतन आनंद, प्रह्लाद यादव व नीलम देवी जदयू, जबकि एक
एमएलए संगीता कुमारी भाजपा के साथ बैठ गए। राजद ने अपने चारों विधायकों को कागज पर अपने साथ देखना पसंद किया।विधायकी खत्म करने को लेकर प्रयास विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी नहीं किया।
कांग्रेस के खेमे से दो निकले, अबतक हटे नहीं
राजद के इन चार विधायकों के अलावा
कांग्रेस के भी दो ने पाला बदला था। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक चुनकर आए थे। इनमें से दो विधायकों सिद्धार्थ सौरव और मुरारी गौतम ने फ्लोर टेस्ट के समय सत्ता के साथ बैठ गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी, हालांकि लगभग नौ महीने बाद भी स्थिति वही है। मतलब, वह कागज पर कांग्रेसी हैं और मन से सत्ता के साथ माने जा रहे हैं।
मतलब,
बिहार विधानसभा में विपक्ष के पास विधायक तो 112 हैं, लेकिन साथ में 106 हैं। सत्ता के पास विधायक तो 131 हैं, लेकिन साथ में 137 हैं।