फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar News : बिहार विधानसभा में 131 विधायकों वाले एनडीए के पास 137 की ताकत कैसे? चुनाव से पहले की तस्वीर देखें

सार

 Amar Ujala Explainer : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक तैयारियां तेज हो रही हैं। पिछले, यानी 2020 के चुनाव से अबतक कई बार दलगत स्थितियां बदली हैं। पेच यह कि कागज पर कुछ और, वास्तविकता में कुछ और ताकत है सत्ता-विपक्ष की। 
विज्ञापन
बिहार विधानसभा में महागठबंधन की कागजी और वास्तविक ताकत। - फोटो : amar ujala digital
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद से उप चुनाव के कारण भी बदला नंबर
  • विधायकी जाने और विधायक के सांसद बनने से भी बदला विधानसभा का गणित
  • बहुमत परीक्षण में महागठबंधन का दांव उलटा पड़ा, साथ नहीं अब छह विधायक

विज्ञापन

बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 25 नवम्बर से29 नवम्बर तक चलेगा। विधानसभा में चुनकर आए चार नए विधायकों के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA MLA in Bihar Assembly) की ताकत और बढ़ गई है। महागठबंधन सरकार गिरने और 2020 के जनादेश के आधार पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकारी की वापसी के बाद 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट हुआ था। इससे पहले राजग की ताकत ठीकठाक थी, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के 'खेला होगा' वाली बात उलट गई और सत्ता की ताकत उस दिन ज्यादा बढ़ गई। इसलिए, पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले यह जानना बेहद रोचक है कि 2020 से अबतक क्या-कुछ हुआ कि जितना कागज पर राजग मजबूत है, उससे ज्यादा वास्तव में। फिलहाल तो यह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सत्ता का मनोबल मजबूत करने वाली स्थिति है। 

पहले यह जानें कि कागज पर कैसे बदलती रही संख्या
बिहार विधानसभा में मौजूदा विधायकों की दलगत संख्या 2020 चुनाव परिणाम के बाद से कई बार बदली। कभी विधायक के निधन से तो कभी किसी की विधायकी जाने के कारण और फिर निर्वाचित विधायक के सांसद बन जाने के कारण। 
विज्ञापन

 

  • भाजपा ने 2020 के चुनाव में 74 सीटें जीती थीं। फिर उसने उप चुनाव में राजद से कुढ़नी विधानसभा सीट छीन ली। तब भी भाजपा की संख्या 75 होती है, लेकिन उसने विकासशील इंसान पार्टी के तीनों विधायकों को अपनी पार्टी में मिला लिया। तीन ही विधायक थे और एक साथ भाजपा में आ गए, इसलिए दल-बदल कानून लागू नहीं हुआ। इससे भाजपा के विधायकों की संख्या 78 थी। अब उपचुनाव 2024 में दो सीटें भाजपा ने अपने खाते में की। रामगढ़ सीट राजद और तरारी भाकपा-माले के पास थी। दोनों के विधायक सांसद बन चुके हैं। इस तरह भाजपा अब कागज पर 80 विधायकों वाली पार्टी है
  • जदयू ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 43 सीटें जीती थीं। इसके बाद जदयू ने बहुजन समाज पार्टी के एक और लोजपा के एक विधायक को अपने साथ कर लिया। इस तरह उसके पास 45 विधायक हो गए थे। इस साल फरवरी में फ्लोर टेस्ट के कुछ समय बाद लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए रूपौली की जदयू विधायक बीमा भारती ने इस्तीफा देकर राजद का दामन थाम लिया। उससे जदयू के विधायकों की संख्या 44 हो गई थी। बीमार भारती की छोड़ी रूपौली सीट जदयू के पास नहीं रही। वहां से निर्दलीय शंकर सिंह जीते, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आस्था जताने के बाद शांत हैं। वह जदयू में नहीं, लेकिन सरकार के साथ हैं। अब उप चुनाव 2024 में बेलागंज सीट राजद से छीनकर जदयू ने अपनी संख्या 45 कर ली है
  • राजद ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसमें से वह अपनी कुढ़नी सीट उप चुनाव में हार गई। वीआईपी के विधायक के निधन से खाली हुई बोचहां सीट उप चुनाव में राजद के पास आ गई। इस तरह उसके विधायकों की संख्या 75 हुई। इधर, राजद ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच में से चार विधायकों को अपने साथ कर लिया। इस तरह राजद की संख्या 79 थी। अब उपचुनाव 2024 में दो सीटें हारने से राजद विधायकों की कागज पर संख्या 77 रह गई। यह दो सीटें बेलागंज और रामगढ़ विधायक के सांसद बनने से खाली हुई थी।
  • भाकपा माले ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 12 सीटें जीती थीं। उनमें से एक मनोज मंजिल की सदस्यता रद्द की गई थी। उनकी सीट के लिए उप चुनाव हुआ तो शिव प्रकाश रंजन ने भाकपा-माले की यह सीट कायम रखी। यह संख्या 12 ही थी, लेकिन अब तरारी सीट के विधायक सुदामा प्रसाद जब सांसद बने तो उनकी छोड़ी सीट को भाजपा ने अपने खाते में कर लिया। इस तरह भाकपा-माले की संख्या 11 हो गई है
  • जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा- सेक्युलर के चार विधायक जीते थे। उनमें से एक वह खुद सांसद बन गए, हालांकि इमामगंज की उनकी विधानसभा सीट बहू दीपा मांझी ने वापस जीत ली। इस तरह विधानसभा में हम-से के चार विधायक ही अब भी हैं
  • असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी के चार विधायक जीते थे, जिनमें से तीन राजद के साथ जाने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष इकलौते AIMIM विधायक के रूप में विधानसभा में हैं। 
  • मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के चार विधायक 2020 के चुनाव में जीते थे। एक का निधन होने से खाली हुई सीट राजद के खाते में चली गई और शेष तीन भाजपा के साथ हो लिए। इस तरह इस VIP की सदस्यता शून्य हो गई है
  • विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक जीते थे, कागज पर आज भी उतने ही हैं। सीपीआई-एम के दो और सीपीआई के दो विधायक जैसे थे, अब भी हैं। 
  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एक निर्दलीय जीते थे- सुमित सिंह। फिर रूपौली के उप चुनाव में बीमा भारती की सीट निर्दलीय शंकर सिंह ने हासिल कर ली। यह दोनों निर्दलीय हैं। इनमें सुमित सिंह सरकार के साथ होकर मंत्री हैं, जबकि शंकर सिंह बाहर से साथ हैं।
विज्ञापन

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से अबतक बार-बार सीटों की संख्या बदलती रही है। - फोटो : amar ujala digital
राजद के खेमे से चार निकले, खाते से नहीं
243 विधायकों का कागजी हिसाब जानने के बाद अब यह जानना रोचक है कि 12 फरवरी को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को विश्वास मत में हराने की तैयारी करने वाले महागठबंधन को जोर का झटका लगा था। फ्लोर टेस्ट के समय तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के साथ खेला की आस लगाए बैठे थे, लेकिन गेम उलटा पड़ गया था। राजद के तीन विधायक चेतन आनंद, प्रह्लाद यादव व नीलम देवी जदयू, जबकि एक एमएलए संगीता कुमारी भाजपा के साथ बैठ गए। राजद ने अपने चारों विधायकों को कागज पर अपने साथ देखना पसंद किया।विधायकी खत्म करने को लेकर प्रयास विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी नहीं किया। 

कांग्रेस के खेमे से दो निकले, अबतक हटे नहीं
राजद के इन चार विधायकों के अलावा कांग्रेस के भी दो ने पाला बदला था। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक चुनकर आए थे। इनमें से दो विधायकों सिद्धार्थ सौरव और मुरारी गौतम ने फ्लोर टेस्ट के समय सत्ता के साथ बैठ गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी, हालांकि लगभग नौ महीने बाद भी स्थिति वही है। मतलब, वह कागज पर कांग्रेसी हैं और मन से सत्ता के साथ माने जा रहे हैं।

मतलब, बिहार विधानसभा में विपक्ष के पास विधायक तो 112 हैं, लेकिन साथ में 106 हैं। सत्ता के पास विधायक तो 131 हैं, लेकिन साथ में 137 हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें