राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बिहार के दो जिलों में छापेमारी की है। एनआईए की टीम ने कैमूर और रोहतास के सात जगहों पर छापेमारी की। टीम को कई आपत्तिजनक डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को बरामद किया। टीम इस मामले में कुछ लोगों से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि एनआईए को सूचना मिली थी कि भर्ती और लेवी वसूली के माध्यम से संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर चल रहा है। सीपीआई (माओवादी) कैडर के इसमें लिप्त होने की जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर टीम ने सीपीआई माओवादी नेताओं के ठिकाने पर छापेमारी की।
सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया
बता दें कि अप्रैल 2022 को भाजपा माओवादी के शीर्ष नेता व कुख्यात नक्सली विजय कुमार आर्य और उमेश चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। दोनों रोहतास में संगठन को मजबूती देने और धन एकत्र करने में जुटे थे। उस वक्त उनके पास से पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, वाइस रिकॉर्डर, की पैड मोबाइल, लेवी रसीदें, प्रतिबंधित आतंकी संगठन के नक्सली पर्चे समेत कई सामान बरामद किए गए थे। इन दोनों पर गया, औरंगाबाद, रोहतास में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। एनआईए की टीम ने इन दोनों से जुड़े सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
डिजिटल उपकरणों को जब्त किया गया था
एनआईए की मानें तो तीन अन्य आरोपी, अनिल यादव उर्फ अनिल व्यास, राजेश कुमार गुप्ता और रूपेश कुमार सिंह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इन पर मामले में एनआईए द्वारा आरोप पत्र दायर किया गया है। तलाशी में जीवित गोला-बारूद के अलावा मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड सहित कुछ आपत्तिजनक दस्तावेजों, डायरियों आदि सहित डिजिटल उपकरणों को जब्त किया गया था। एनआईए का कहना है कि भर्ती और लेवी वसूली के माध्यम से सोन गंगा विंध्याचल जोनल एड्हॉक कमेटी को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहे सीपीआई (माओवादी) कैडरों के बारे में और सुराग के लिए उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।