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Lok Sabha Election : राम को काल्पनिक बताने वाले अब जा रहे अयोध्या, लौटकर गया से नामांकन करेंगे जीतन राम मांझी

Thu, 21 Mar 2024 09:00 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, गया

सार

Bihar : इंडी गठबंधन में रहते हुए राम को काल्पनिक बताने वाले का मिजाज एनडीए का दामन थामते ही बदल गया। उनका मन प्रभु श्री राम पर जाकर अटक गया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब वह राम लला के दर्शन करने के बाद ही अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करेंगे।
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जीतनराम मांझी। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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श्री राम और रामायण ग्रंथ के प्रति हमेशा कुछ न कुछ बोलते रहने को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले पूर्व सीएम जीतन राम मांझी दल बदलने के साथ साथ अब उनके मिजाज भी बदल गये हैं। राम को काल्पनिक बताने वाले जीतनराम मांझी अब अयोध्या जा रहे हैं।

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अयोध्या से लौटकर करेंगे उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल
गया संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवारी की घोषणा होने के बाद जीतनराम मांझी ने घोषणा करते हुए कहा कि पहले वह अयोध्या जाकर प्रभु राम लला का दर्शन करेंगे उसके बाद वापस गया लौट कर अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करेंगे। जीतनराम मांझी ने बताया कि 23 मार्च को पूरे परिवार के साथ वह अयोध्या जा रहे हैं। वहां से लौट कर 28 को नामांकन दाखिल करेंगे। आज गया के एक निजी होटल के सभागार एनडीए कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

इंडी गठबंधन पर भी कसा तंज
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इस दौरान अपने पुराने साथियों यानी इंडी गठबंधन पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि इंडी एलाइंस तास के पत्तों की  तरह बिखर गया है। उन्होंने विपक्षी दलों को मेढक से तुलना करते हुए कहा कि बेंग को एक साथ तराजू पर तौलना नामुमकिन होता है।
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जानिये कब रामायण और राम को बताया था काल्पनिक
बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी दिल्ली में चल रहे 'हम' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विवादित बयान दिया था। इससे पहले उन्होंने सितंबर महीने में रामायण को लेकर विवादित बयान दिया था। पटना में मीडिया ने उनसे मध्य प्रदेश की तर्ज पर बिहार के स्कूली पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल करने को लेकर सवाल पूछा था। तब हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष ने पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल करने की जरूरत तो बताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि 'रामायण की कहानी सत्य पर आधारित नहीं है।' श्रीराम महापुरुष थे, वह इस बात को भी नहीं मानते। उन्होंने कहा था कि रामायण एक काल्पनिक ग्रंथ है।
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