Bihar News : शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा नहीं, बल्कि उनके आवेदन पर अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया। 'अमर उजाला' की कल दी गई जानकारी पर आज सरकार ने मुहर लगाई।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थी, उसपर अब लगाम लग चुका है। बिहार सरकार के शिक्षा विजय चौधरी ने सारी चीेजें स्पष्ट कर दी है। उन्होंने 'अमर उजाला' की कल दी गई जानकारी पर आज मुहर लगाई। विधानसभा परिसर में मीडियो के सवालों का जवाब देते हुए साफ कह दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने केके पाठक को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजा है। बल्कि इसके लिए उन्होंने खुद इसके लिए आवेदन दिया था। उनके आवेदन पर बिहार सरकार ने अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया है। उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से बिहार सरकार को कोई दिक्कत नहीं है। इसलिए उन्होंने एनओसी दे दिया गया है।
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सीएम नीतीश ने आगे बढ़ाया, उन्हीं पर पड़े भारी
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को 'बिहारी' के साथ गालियों का वीडियो वायरल होने पर भी केके पाठक पाक-साफ बचे रहे तो अंदाजा लग रहा था कि उनके ऊपर सीधे मुख्यमंत्री का हाथ है। इस हाथ की पुष्टि तब और हो गई, जब महागठबंधन सरकार खत्म होने से कुछ दिनों पहले पाठक की लंबी छुट्टी से लौटने के पहले मुख्यमंत्री ने उनसे भिड़ने वाले राष्ट्रीय जनता दल कोटे के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर को ही बदल डाला। मंत्री की कुर्सी बदलवाने में सक्षम साबित हुए पाठक ने इसके बाद एक लगातार कई ऐसे फैसले लिए, जिससे सरकार असहज हुई।
राजद विधायकों ने केके पाठक पर कार्रवाई की मांग की थी
सदन में विपक्ष के विधायकों ने हंगामा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि वह इसके लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को कह चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने पाठक को तत्काल बुलाकर पूछा भी कि उन्होंने स्कूलों की समय सारिणी में उनके निर्देशानुसार बदलाव क्यों नहीं किया? इतना कुछ होने के बाद भी पाठक अपनी बात पर अड़े रहे। स्पष्टीकरण की चिट्ठियां जारी करते रहे, लेकिन सीएम के सदन में दिए आश्वासन के हिसाब से काम नहीं किया। और तो और, समय सारिणी में सुधार का एक आदेश उनके मातहत किसी अधिकारी ने जारी कर दिया तो उसे फर्जी बताते हुए विभाग के ही अधिकारी से स्पष्टीकरण दिलवाया। गुरुवार को विधानसभा में विपक्ष ने उन चिट्ठियों पर भी बवाल किया और राजद ने तो मुख्यमंत्री की कमजोरी के साथ सदन की अवमानना भी करार दिया। राजद विधायकों ने तो केके पाठक पर कार्रवाई की मांग तक कर दी।