बिहार के सबसे अमीर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ख्याति प्राप्त दिग्गज सच्चिदानंद अब जनसुराज के सूत्रधार अब प्रशांत किशोर के साथ हो लिए हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने प्रेसवार्ता जारी कर दी। उन्होंने कहा कि रात में अगर कोई चोर के भेष में आकर चोरी कर लेता है तो शक साधु पर होगा, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि सब साधु चोर ही हैं। वह जब साधु बाबा वाला काम करेगा तो पता चल जाएगा। सच्चिदानंद ने कहा कि अरविंद केजरीवाल नौकरी छोड़कर प्रयोग कर रहे थे कि कैसे दिल्ली पर दखल किया जाए। वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर हजारों करोड़ के कंपनी को छोड़कर अब पदयात्रा कर रहे हैं।
यहां कमाने नहीं आए हैं
उन्होंने कहा कि हम यहां कमाने नहीं आए हैं। ललाट पर हाथ से इशारा करते हुए कहा कि बिहारी के रूप में जो हमें गाली लग गई है, इसको चमकाने आए हैं ताकि एक-एक बिहारी गर्व से कह सके कि हम बिहारी हैं। उन्होंने कहा कि हमको छोटा चीज मत दिखाइए। उन्होंने प्रशांत किशोर के संबंध में कहा कि पीके अक्सर कहते हैं कि हम कोई छोटा सपना नहीं देखे हैं। हम मंत्री या मुख्यमंत्री की बात नहीं कर रहे हैं। हम अपने जीवन काल में विकसित बिहार देखना चाहते हैं। इतना बड़ा सपना है कि जितने लोग इसमें जुड़े हैं, सब इसी सपना के साथ जुड़े हैं। मैं यह मान कर चलता हूं कि बिहार का एक-एक सही व्यक्ति अंत में छूटेगा नहीं, सही लोग स्वयं आकर इसे जुड़ेंगे और जनसुराज उनकी पार्टी होगी, उनका दल होगा और उनकी सरकार होगी।
जानिए कौन हैं सच्चिदानंद राय
सच्चिदानंद राय सारण जिला के बनियापुर प्रखंड अंतर्गत लौवा कलां के रहने वाले हैं। उन्होंने बनियापुर से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण किया, फिर कलकत्ता से उच्चतर शिक्षा ग्रहण किये। IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद सच्चिदानंद राय दर्जनों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनी में काम किये। वह रियल एस्टेट सहित आईटी कंपनी के मालिक भी हैं। सच्चिदानंद राय के दो पुत्र आईआईटी इंजीनियर हैं। MLC चुनाव में दिए गये हलफनामा के अनुसार सच्चिदानंद राय 890 करोड़ के मालिक हैं। हालांकि आज की तारीख में यह आंकड़ा 890 करोड़ से ज्यादा होगा।
कई वजहों से है इनका नाम
सच्चिदानंद राय को लोग शिक्षा प्रेम भी कहते हैं। ऐसा कहने के पीछे इसके कई कारण हैं। सच्चिदानंद राय संत जलेश्वर अकादमी नाम से एक संस्था संचालित करते हैं जिसके अंतर्गत वह अपने गांव में लड़कियों के लिए शिक्षा से लेकर खेलकूद तक को वह प्रोत्साहित करते हैं। वह नर्सरी से लेकर 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। इतना ही नहीं वह खेल के माध्यम से लड़कियों को राष्ट्रीय स्तर तक प्रशिक्षण प्रदान करते है। हैंडबॉल और साइक्लिंग के लिए लड़कियों के खेल का पूरा खर्च वह खुद वहन करते हैं। खेल प्रेमी होने के कारण वह खेल संगठन के संरक्षक भी हैं।