General Knowledge : सामान्य ज्ञान की जानकारी बढ़ाने के लिए बच्चों को शोध कर सामग्री दी जाती है, लेकिन बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में चल रही भूगोल की किताब ने मोहल्ले के एक छोटे तालाब को डल झील, कांवर झील जैसा बताकर अजूबा कर दिया है।
बिहार में इनदिनों शिक्षकों की गुणवत्ता और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले इसको लेकर शिक्षा विभाग अपर सचिव के के पाठक लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसको लेकर वह लगातार स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन दरभंगा जिला एक बार सुर्खियों में है। वजह है बिहार बोर्ड के द्वारा नौवीं कक्षा के भूगोल की पुस्तक में दरभंगा को लेकर एक गलत तथ्य छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।
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क्या लिखा है पुस्तक में
बिहार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से बिहार स्टेट टेक्स्टबुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन के द्वारा प्रकाशित की गई भूगोल की नौवीं कक्षा की पुस्तक "भारत : भूमि एवं लोग के अध्याय तीन" में ड्रेनेज पैटर्न में नदियों के विषय में जानकारी दी गयी है। इस पुस्तक के पृष्ठ संख्या 39 पर जलाशय (झील) से संबंधित तथ्य का उल्लेख किया गया है। 'कश्मीर का डल झील तथा वुलर झील, नैनीताल, राजस्थान का सांवर झील, बेगूसराय के कांवर पक्षी विहार, बेतिया का सरैयामान, दरभंगा का लक्ष्मीसागर जैसे जलाशय से आप परिचित हैं। ये मानवीय उपयोग के साधन के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं। यह उस पुस्तक का अंश है, जबकि दरभंगा के लक्ष्मीसागर मोहल्ला में एक छोटा सा तालाब है। इससे काफी बड़े-बड़े तालाब हराही, दिग्धी, गंगासागर आदि शहर के बीच में अवस्थित हैं। पढ़ने वाले दरभंगा के छात्र समझ नहीं पा रहे हैं कि लक्ष्मीसागर मोहल्ला का छोटा तालाब झील कैसे हो गया। पुस्तक में इसके झील के स्वरूप में चर्चा की गयी है, जबकि सच्चाई यह है कि इसका भौगोलिक स्वरूप भी झील जैसा नहीं है। पर्यटक तो दूर की बात है स्थानीय लोग भी इस तालाब के कथित आकर्षण में खींचकर वहां नहीं जाते है।
क्या कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी समर बहादुर सिंह ने कहा कि लक्ष्मीसागर मोहल्ला में एक बड़ा तालाब है। पर्यटन विभाग शायद इस तालाब को झील में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई है। इस वजह से पुस्तक में लक्ष्मीसागर झील का जिक्र आया है।