हिंदुओं के पर्व-त्योहारों की छुट्टी काटने को लेकर तीसरी बार यह बवाल हो रहा है।
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बिहार में सरकारी अवकाश को लेकर एक बार फिर हंगामा मच गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में इस बार भी विवाद राष्ट्रीय जनता दल के कोटे वाले शिक्षा विभाग के कारण उभरा है। भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुओं की छुट्टी काटकर मुसलमानों का अवकाश बढ़ाए जाने को तुष्टिकरण बताते हुए बवाल काटना शुरू कर दिया है। हालत यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के भी कुछ नेता कहने को मजबूर हुए हैं कि कुछ गलती हो गई है तो उसे सुधारा जाए या कुछ बातें अस्पष्ट हैं तो उन्हें साफ किया जाए। क्या है आखिर छुट्टी कटौती और बढ़ाए जाने का मुद्दा? कहां सचमुच गड़बड़ी हुई है या कहीं ऐसा कुछ हुआ ही नहीं- जानना जरूरी है।
दो कैलेंडर, हिंदू त्योहारों पर छुट्टी घटाने से गुस्सा
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सरकार ने दो तरह के कैलेंडर जारी किए हैं। सामान्य स्कूलों के लिए अलग और उर्दू-अल्पसंख्यक स्कूलों/मकतबों के लिए अलग। दोनों तरह के स्कूलों को बराबर छुट्टियां दी गई हैं। दोनों की छुट्टियों में चार-चार दिन की कटौती की गई है। जहां तक पर्व-त्योहारों का सवाल है तो भाजपा का आरोप है कि जन्माष्टमी, शिवरात्रि, वसंत पंचमी जैसी हिंदू छुट्टियों को खत्म करते हुए सामान्य स्कूलों में भी मुसलमान धर्म से जुड़े अवकाशों को बढ़ा दिया गया है। प्रारंभिक और मध्य विद्यालय से लेकर मैट्रिक-इंटर स्तर में बिहार बोर्ड की परीक्षा लेने वाले सरकारी स्कूलों में यह छुट्टियां लागू की गई हैं। अवकाश घटाए जाने पर सबसे पहले भाजपा के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विरोध जताया। इसके बाद भाजपा कोटे से उप मुख्यमंत्री रह चुके राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने भी अलग-अलग जगह से सरकार को घेरा। शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर हिंदू धर्म शास्त्रों पर जिस तरह हमलावर रहे हैं, भाजपा इसमें उनकी ही मंशा बता रही है। भाजपा का कहना है कि लालू प्रसाद यादव के मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को उनके शिक्षा मंत्री ने आगे बढ़ाया है।