अमित लोढ़ा और अभिनेता करण टैकर।
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क्या लिखा था एफआईआर में
प्राथमिकी के अनुसार, 2 नवंबर 2018 को अमित लोढ़ा और फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के बीच एक रुपये में करार हुआ और उनके खाते में 12,372 रुपए आये। उनपर यह भी आरोप है कि लोढ़ा ने स्थापित कहानीकार नहीं होते हुए भी बगैर अनुमति के न केवल किताब लिखी, बल्कि प्रोडक्शन हाउस से इस किताब पर 'खाकी: द बिहार चैप्टर’ बनाने के लिए पत्नी कौमुदी लोढ़ा के द्वारा 49,62,372 रुपए अर्जित भी किये। लोढ़ा पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड विधान 120 (B) और 168 के तहत यह केस दर्ज किया गया। वरीय अधिवक्ता पंकज मैजरवार के अनुसार, दोनों भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की जो भी धाराएं हैं, वह लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा को धूमिल करने वाली हैं। इन धाराओं में एक साल से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान दर्ज है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वह तथ्यों को लेकर पेश किए गये सबूतों को कितना विश्वसनीय मानता है।