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सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह अभियान: खुद को स्वच्छता की नजीर बनाने में जुटा जिला सुपौल

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सुपौल: सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह कार्यक्रम में ग्रामीण
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बिहार में चंपारण शताब्दी समारोह का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अप्रैल को करेंगे। राज्य में जोरदार तैयारियां चल रही हैं। पूरा प्रदेश स्वच्छता के नारों से गूंज रहा है। हर जिला खुद को साफ-सफाई की नजीर बनाने के लिए पूरी कोशिश में जुटा हुआ है। प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीण भी इस अभियान में अपना सहयोग दे रहे हैं। लोगों को शौचालय के प्रति सजग करने के लिए कई राज्यों के स्वच्छताग्रही भी गांव-गांव जाकर लोगों को जानकारियां दे रहे हैं। इसी कड़ी में अमर उजाला की टीम बिहार में स्वच्छता अभियान का जायजा लेने के लिए सुपौल जिले में पहुंची। 

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नेपाल सीमा से सटे सुपौल जिले में कुल 11 ब्लॉक और 181 पंचायते हैं। जिनमें से 49 पंचायतें पूर्ण रूप से ODF (खुले में शौच मुक्त) घोषित की जा चुकी हैं। जबकि 60-70 पंचायतें ODF होने की कगार पर हैं, यहां 90 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा किया जा चुका है। जिले की कमान संभाल रहे उप विकास आयुक्त डॉ नवल किशोर चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया अप्रैल माह तक सभी प्रखंडों को ओडीएफ करने का टारगेट रखा गया था। उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि इसे तय समय में पूरा कर लिया जाएगा। 

चुनौतियां 

उप विकास आयुक्त डॉ नवल किशोर चौधरी ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य, सिर्फ शौचालय बनवाना नहीं बल्कि लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना भी है। डॉ किशोर के मुताबिक लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने खुद गांवों का दौरा किया। ग्रामीणों को इसकी उपयोगिता और महत्व के बारे में बताया। चुनौतियों पर बात करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि कोशी नदी के किनारे बसे होने के चलते हमारी चुनौतियां अन्य जिलों के मुकाबले बढ़ गई। ऐसी अवस्था में पोर्टेबल टॉयलेट का कॉन्सेप्ट तैयार किया गया, जिसका स्थान परिस्थिति के हिसाब से बदला जा सकता है।   

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