मामले में जमानत मिल गई है। आपको बता दें कि इससे पहले भागलपुर दंगे के आरोपी अर्जित शाश्वत चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
उन्होंने भागलपुर कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। अर्जित को गिरफ्तार करने के बाद सीजेएम कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। जिसके बाद उन्होंने जमानत के लिए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गिरफ्तारी के बाद अर्जित ने कहा था कि उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह भाग गए थे। उन्होंने कहा था कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं भागा नहीं था। उन्होंने कहा था कि मुझे बेवजह फंसाया जा रहा है।
अर्जित का कहना था कि वह न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और इसलिए वह यहां आए हैं। अगर मुझे भागना होता तो यहां नहीं आता। मैं एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। उन्होंने कहा कि अगर यहां जय श्रीराम, वंदेमातरम और भारत माता की जय बोलना अपराध है तो मैं अपराधी हूं।
बता दें कि इस मामले में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित की भागलपुर कोर्ट में सुनवाई के बाद एडीजे चतुर्थ कुमुद रंजन सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उल्लेखनीय है कि वारंट जारी होने के बाद शाश्वत फरार चल रहे थे।
अर्जित शाश्वत चौबे भागलपुर के नाथनगर उपद्रव मामले में नामजद आरोपी हैं। इस मामले में अर्जित शाश्वत चौबे, अभय कुमार घोष, प्रमोद वर्मा पम्मी, देव कुमार पांडेय, सुरेंद्र पाठक, अनुप लाल साह, संजय भट्ट, प्रणव साह उर्फ प्रणव दास के खिलाफ न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट निर्गत किया है।