कोविड-19 को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बीच पंजाब से पैदल चलकर बिहार के मधेपुरा जिले पहुंचे नौ प्रवासी मजदूरों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन प्रवासी मजदूरों का कसूर सिर्फ इतना है कि इन्होंने मधेपुरा के क्वारंटीन केंद्र में बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने की शिकायत की थी। इन सभी को इसी क्वारंटीन केंद्र में रखा गया था। अब इन पर एफआईआर दर्ज की गई है और जल्द ही इन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
इन प्रवासी मजदूरों पर 20 मई को मधेपुरा के कुमारखंड ब्लॉक के अंतर्गत रामनगर महेश गांव में स्थानीय अधिकारियों की सहमति के बिना क्वारंटीन केंद्र को बदलने के आरोप में आईपीसी की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इन प्रवासियों में से एक मनोज मुखिया ने बताया कि 17 मई को स्क्रीनिंग के बाद कुमारखंड ब्लॉक के अधिकारियों ने रामनगर महेश के माध्यमिक स्कूल में हम तीन लोगों को क्वारंटीन किया। हाल ही में, इस स्कूल को क्वारंटीन केंद्र बनाया गया था। उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों में, छह और लोग यहां रहने आ गए। इस केंद्र में कोई भी सुविधा नहीं थी, यहां तक कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं थी।
क्वारंटीन केंद्र में खराब परिस्थितियों से नाराज प्रवासी मजदूरों ने यहां का एक वीडियो बनाया और इसे 19 मई को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। इससे स्थानीय अधिकारी नाराज हो गए।
इसके बाद कुमारखंड के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) उसी शाम स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ केंद्र पर पहुंचे और प्रवासियों को दूसरे केंद्र में ले गए। अगले दिन ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करने और क्वारंटीन केंद्र नामित नहीं किए गए स्कूल में रहने के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
हालांकि, एएनआई द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि स्कूल को प्रवासियों के लिए क्वारंटीन सुविधा के रूप में नामित किया गया था और मामला दर्ज किए गए लोगों में से कम से कम तीन को पूर्वोक्त केंद्र आवंटित किया गया था।
एएनआई के पास मौजूद एक कॉपी के अनुसार, 23 मार्च को कुमारखंड के बीडीओ ने आधिकारिक आदेश के तहत रामनगर माध्यमिक स्कूल को क्वारंटीन केंद्र के रूप में नामित किया था।