बिहार के वित्त मंत्री ने कहा कि हम मदद के हकदार है। इसलिए हम विशेष राज्य का दर्जा की मांग कर रहे हैं। हम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वित्तीय विश्वसनीयता बनाई है, इसके बावजूद बिहार को मदद नहीं दिया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केद्र सरकार बिहार में समग्र शिक्षा अभियान के लिए पैसा नहीं देती। राज्य अपने स्तर से ही शिक्षकों को पैसा देती है। समग्र शिक्षा अभियान में बिहार सरकार अपना पैसा लगागी है। केंद्र ने ऋण संबंधित दायरे को छोटा किया है। केंद्र ने स्कीम बनाकर राशि तय की थी। इसमें 46147 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन मात्र 24,319 करोड़ ही दिए गए।
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2 लाख 33 हजार करोड़ रुपये व्यय किया गया
वित्त मंत्री ने का कि जब हम सीमित संसाधनों के जरिए विकसित राज्य के विकास दरों को चुनौती देते हैं। हम मदद के हकदार है। इसलिए हम विशेष राज्य का दर्जा की मांग कर रहे हैं। हम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वित्तीय विश्वसनीयता बनाई है, इसके बावजूद बिहार को मदद नहीं दिया जा रहा है। विजय चौधरी ने कहा कि 2022-23 में बिहार में कुल 2 लाख 33 हजार करोड़ रुपये व्यय हुए, जबकि सरकार ने 2 लाख 27 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था। बिहार सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष (2022-23) में 99 प्रतिशत खर्च किया।
हम सबसे तेज गति से तरक्की कर रहे हैं
केंद्र सरकार ने बिहार को ऋण लेने पर भी पाबंदी लगा दी है। पहले कुछ स्कीम पर जो हमलोगों ने ऋण ली थी, उसपर भी पाबंदी लगा दी गई है। हमारे पास जो भी संसाधन हैं, उसमें हम सबसे तेज गति से तरक्की कर रहे हैं। गरीबी के पैमाने पर हम काफी नीचे हैं, फिर हम बेहतर कर रहे। बिहार के प्रति भेदभावपूर्ण भावना रखने के कारण बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दी जा रही है। हमलोग मांग करते हैं कि केंद्र सरकार बिहार के साथ भेदभाव पूर्ण नीति बंद है। पिछले वर्ष की उपलब्धियों और आंकड़ों का विश्लेषण करके बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करें। केंद्र से अपील है कि इतना नजरअंदाज मत कीजिए। बिहार का जो हक है वह कम से कम दे दीजिए।