बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार में राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के लिए डाटा संग्रह की तारीखों का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में 15 मई से 28 मई 2020 तक एनपीआर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सुशील मोदी ने कहा कि कोई भी राज्य एनपीआर से इनकार नहीं कर सकता है। ये केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है और हर राज्य इसे मानने के लिए बाध्य है। सुशील मोदी ने ये बातें शनिवार को बिहार भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
ननकाना साहिब घटना ने बताया कि सीएए देश में जरूरी है
सुशील मोदी ने नागरिकता कानून पर कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जाता है, इसका उदाहरण ननकाना साहिब में सिख लड़की की अपहरण और धर्मान्तरण के बाद मुस्लिमों द्वारा गुरुद्वारा पर हमला होने से पता चलता है।
मोदी ने कहा कि पाकिस्तान में 1947 में 23 प्रतिशत हिंदू थे और आज 3.7 फीसदी से भी कम हो गए हैं। जबकि बांग्लादेश में 22 फीसदी से घटकर मात्र 7.8 फीसदी हिंदू रह गए हैं। इसी तरह अफगानिस्तान में 1992 में दो लाख हिंदू-सिख थे, अब 500 भी नहीं हैं।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) ऐसे ही अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता देता है। बिहार में आजादी के बाद से 3,50,000 हिंदू शरणार्थी आए, जिन्हें राज्य के अलग-अलग जिलों में बसाया गया।
देश के हर हिस्से में लागू होगा एनपीआर
सुशील मोदी ने साफ कहा कि बिहार में एनपीआर का कार्य 15 मई से 28 मई 2020 के दौरान जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना किया जाएगा। साथ ही देश के दूसरे हिस्सों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यूपीए के कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2010 में एनपीआर बनाने का निर्णय लिया गया। 2020 में एनपीआर का काम यूपीए के समय लिए गए निर्णय के अनुरूप ही होगा। एनपीआर 2010 को ही 2020 में अपडेट किया जा रहा है। इसके लिए कोई नया रजिस्टर तैयार नहीं किया जा रहा है।