क्या है पूरा घोटाला
महालेखाकार कार्यालय, पटना की ऑडिट रिपोर्ट में बुडको के भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। सीएजी ने अब तक के पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स में बुडको के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी है। जिसमें 13 अरब से अधिक के वित्तीय अनियमितता उजागर की बात कही गई है। आपको बता दें कि सीएजी ने सबसे पहले साल 2011-12 में बुडको का ऑडिट किया था। फिर वर्ष 2013-14 और 2015-16, 2016-17 और 2017-18 का ऑडिट किया। इन सभी ऑडिट में सीएजी ने बुडको के भ्रष्टाचार को पकड़ा और अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी।
पहले ऑडिट में ही की थी गड़बड़ी की बात
लगातार चल रही अनियमितताओं के बीच आरटीआी कार्यकर्ता ने इस बाबत लिखित शिकायत भी की थी लेकिन सरकार की कान पर जूं तक नहीं रेंगी। और कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं सीएजी ने पहले तीन ऑडिट में ही 10 अरब 50 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता पकड़ ली थी।
सरकार को जानकारी देने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई कार्यकर्ता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को 19 सितम्बर 2016 को कारवाई के लिए लिखित शिकायत भी की लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई। सीएजी ने 2016-17 और 2017-18 के दो ऑडिट रिपोर्ट में और दो अरब 52 करोड़ से अधिक के वित्तीय गड़बड़ियों को पकड़ लिया।
बुडको ने किया नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा
दरअसल बुडको ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा किया। लेकिन इस दौरान उसने भ्रष्टाचार की सारी सीमाओं को भी पार किया। सीएजी ने शुरुआती ऑडिट में ही 125 करोड़ 53 लाख की लागत से पटना में बनाए गए बुद्धा स्मृति पार्क में कई वित्तीय अनियमितताओं को पकड़ा था।
इसमें कुल 67 करोड़ 20 लाख से अधिक की वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं थी। रिपोर्ट के अनुसार पार्क के निर्माण में संवेदक पारसनाथ डेवलपर्स लिमिटेड द्वारा भारी अनियमतता की गई। इसमें बुडको के अधिकारियों की भूमिका अहम रही। बुद्धा स्मृति पार्क बनाने में बीओक्यू यानि स्टीमेट 58 से 78 प्रतिशत तक अधिक बनाकर सरकारी राशि की बंदरबांट की गई। इसमें कई और निजी कंपनियों को भी खूब फायदा पहुंचाया गया।
जून 2009 से जून 2017 तक सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में बुडको में गड़बड़ी पकड़ी गई। एक तथ्य ये है कि 13 अरब से अधिक की इन वित्तीय गड़बड़ियों को अबतक विभाग ने खारिज भी नहीं किया है। इन वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल ने मुख्य सचिव से मांग की है। 17 सितम्बर को की गई जांच की मांग पर कहीं से कोई प्रशासनिक हरकत नहीं दिख रही है।
आपको बता दें कि सीएजी ने पहले के तीन निरीक्षण रिपोर्ट में बुडको से वित्तीय आपत्तियों पर चार सप्ताह में जवाब मांगा था। जबकि पिछले दो वित्तीय वर्ष के ऑडिट में गड़बड़ियों पर छह सप्ताह के भीतर बुडको से जवाब मांगा था। आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल और अशोक कुमार मिश्र ने मुख्य सचिव से लेकर राज्यपाल तक को इस पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक जांच नहीं की गई है।
सवाल ये है कि आखिर आठ सालों के ऑडिट रिपोर्ट पर बुडको ने सीएजी को क्यों जवाब नहीं दिया है। सवाल ये भी कि वर्ष 2016 में राज्यपाल और सितम्बर 2018 में मुख्य सचिव से इस मामले की जांच की मांग की गई, लेकिन इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई। बहरहाल अब भी सरकार ने जांच के लिए कोई पहल नहीं की है। इसलिए 13 अरब से अधिक की इस वित्तीय अनियमितता को पटना हाई कोर्ट ले जाने की तैयारी की जा रही है। जाहिर है इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है।