अमावां एस्टेट के किले में होली पर आए विदेशी मेहमान।
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अमावां एस्टेट के किले से आप सभी वाकिफ तो जरूर होंगे। यह वही एस्टेट है जिनके राजा को इग्लैंड की महारानी ने बहादुर की उपाधि दी। इस होली यह एस्टेट फिर से चर्चा में है। इस बार यहां होली मनाने विदेशी मेहमान आए हैं। मंगलवार से होली समारोह यहां शुरू हो चुका है। विदेशी मेहमान होली के गीतों पर झूमते नजर आएं। वह यहां आकर खूब खुश हैं। 60 देश से आये विदेशी मेहमानों इस किले को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। एक विदेश मेहमान करीब एक सौ बर्ष पहले बना भवन की कलाकृतियों ने विदेशी मेहमानों का मनमोह लिया। किले की नक्कासी देख लोग भाव-विभोर हो गए।
ब्रिटेन में बहन की बहुत बड़ी कंपनी है
इधर, विदेशी मेहमानों को अमावां एस्टेट के राजा हरिहर नारायण प्रसाद सिंह के पौत्र, प्रपौत्र व पौत्रवधू ने फूलों की माला व गमछा देकर सम्मानित किया। राजकुमार हर्षेन्द्र ने कहा कि ब्रिटेन में हमारी बहन की बहुत बड़ी कंपनी है। अधिकांश विदेशी मेहमान हमारी बहन की कंपनी के साथ जुड़े हैं। दरअसल, सभी मेहमान बनारस घूमने आए थे। इसके बाद बोधगया आए। इसी बीच हमलोगों के आग्रह पर सभी विदेशी मेहमान अमावां आ गए। उनके आने से रौनक बढ़ गई है।
अमावां एस्टेट के किले में होली समारोह।
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विदेशी मेहमान महादेव की भक्ति में लीन हो गए
राजकुमार हर्षेंद्र ने कहा कि अधिकांश विदेशी मेहमान हिन्दू धर्म को अपना लिया है। नालंदा के अमावां राज की धरती पर आये विदेशी मेहमान महादेव और भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। भक्ति गीतों पर जमकर झूमने लगे। मंगलवार को सुबह विदेशी मेहमानों ने फूलों की होली खेली। इसके बाद एक दूसरे को गुलाल लगाकर अभिवादन किया। यहां के लजीज पुआ-पकवान ने उनका मन मोह लिया। बिहार व्यंजन का भी विदेशी मेहमानों ने स्वाद चखा।
भक्ति गानों पर झूमते विदेशी मेहमान।
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इस किले में 52 कोठरी 53 द्वार व सात आंगन
कलाकृतियों से ओतप्रोत इस किले में 52 कोठरी 53 द्वार व सात आंगन हैं। महामारी से बचाव करने के पुख्ता इंतजाम थे। इतना ही नहीं अंग्रेजी हुकूमत के समय जब क्षेत्र में शिक्षा व स्वास्थ्य का काफी अभाव था, इलाज के लिए अस्पताल नहीं थे। उस जमाने में स्वास्थ्य लाभ के लिए लोग आमावां आयुर्वेदिक अस्पताल आते थे। कहा जाता है कि 1860 से 1952 तक अमावां एस्टेट वक्त नालंदा से लेकर कोसी, अंग प्रदेश, मगध, काशी औ वृंदावन तक फैल हुआ था। यह एस्टेट फलता-फूलता रहा था।