जनता दल यूनाइटेड में औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद निशांत कुमार ने फिलहाल किसी पद में अपनी रुचि नहीं दिखाई थी। वह यात्रा पर हैं। राजनीति को समझने की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी से नीतीश कुमार के हटने की चर्चा शुरू होने के बाद उन्हें कभी सीएम तो कभी डिप्टी सीएम बनाने की बात हो रही थी। सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री घोषित हुए तो भी मीडिया का एक बड़ा वर्ग निशांत को डिप्टी सीएम के रूप में आगे कर रहा था। वह नहीं हुआ। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपने दो पुराने और विश्वसनीय नेताओं को डिप्टी सीएम की कुर्सी दी। अब जब मंत्रिमंडल विस्तार हो रहा है, तो एक बार फिर निशांत कुमार का नाम उछला है। उन्हें मंत्री बनाने की चर्चा चल रही है, हालांकि जनता दल यूनाइटेड के दिग्गज और नीतीश कुमार को समझने वाले नेता बगैर सामने आए इस संभावना से इनकार करते हुए यह भी कह रहे हैं कि अंत में वह मान सकते हैं।
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नेताओं ने कहा- निशांत कुमार को इतना नीचे जाने की जरूरत नहीं
इस संबंध में एक जदयू नेता ने 'अमर उजाला' से बातचीत में कहा कि निशांत कुमार को इतना नीचे जाने की जरूरत नहीं है। इसके पीछे उन्होंने दो तर्क दिए। इस संबंध में उन्होंने पहला तर्क दिया कि 15 दिन पहले निशांत कुमार के द्वारा यह कहा गया था कि अभी मैं पूरे बिहार का भ्रमण कर बिहार को समझने की कोशिश करूंगा। इस दौरान बिहार की जनता भी मुझे समझेगी। इसके बाद आने वाले समय में पार्टी यह तय करेगी कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। वहीं उन्होंने दूसरा तर्क यह दिया कि निशांत कुमार के लिए जब बात उप मुख्यमंत्री बनने की चल रही थी तब ऐसे में अब मंत्री बनना कहाँ तक उचित है? यह तो पद के हिसाब से उप मुख्यमंत्री के पद से भी नीचे जाने की बात है। इसलिए अगर निशांत कुमार को राजनीति में लंबे समय तक रहना है तो फ़िलहाल सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल से दूर रहना ही उनके लिए बेहतर साबित होगा। दूसरी तरफ, कुछ नेता यह भी तर्क दे रहे हैं कि पांच साल की सरकार ने अभी अपनी पारी शुरू की है, इसलिए निशांत को राजनीति में सक्रिय शुरुआत मंत्री के रूप में करनी चाहिए। इसके लिए उन्हें राजी करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
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पार्टी के अंदरखाने में चर्चा
निशांत कुमार के मंत्री बनने का फैसला पूर्ण रूपेण जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्णय से ही होगा और ऐसा आदेश अब तक नहीं आया है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर अभी एक बड़ी बैठक चल रही है, जिसमें कुछ लोगों के द्वारा यह चर्चा की गई है। फिर भी नीतीश कुमार का इस संबंध में अंतिम फैसला बैठक के बाद स्पष्ट हो जाएगा। कहा जा रहा है कि इसमें निशांत को मनाया जा रहा है कि वह मंत्री बनकर ग्राउंड पर काम करें।
क्या हो अगर निशांत कुमार मंत्री की कुर्सी स्वीकार कर लें
इस संबंध में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जदयू में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद अगर सबसे बड़ा कद किसी का है तो वह नाम निशांत कुमार का है। ऐसे में अगर वह सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल हो जाते हैं तो वह उतना वीआइपी नहीं रह पाएंगे, जितना जदयू में अभी उन्हें लेकर पार्टी चल रही है। दूसरी तरफ, फायदा यह है कि वह मंत्री बनकर ज्यादा बेहतर सेवा कर सकेंगे। अहं की जगह काम कर वह बेहतर कर सकेंगे।
क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार ?
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि जदयू में कुछ युवा चाटुकार नेता हैं जो अपनी जगह बनाने और मलाई खाने के लिए इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। दरअसल इस तरह की कोई बात नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि राजनीति में लंबी पारी खेलने के लिए यह फैसला उचित नहीं है। चूंकि नीतीश कुमार बहुत ही उम्दा के राजनीतिज्ञ हैं इसलिए निशांत कुमार को सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल कराने की वह गलती नहीं करेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार न तो उपेन्द्र कुशवाहा हैं और न ही निशांत कुमार, दीपक प्रकाश।