एसडीएम दो मौजों में उपलब्ध सरकारी भूमि का सर्वेक्षण कर प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजा
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भागलपुर के कहलगांव प्रखंड के अंतीचक में प्रस्तावित विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय के लिए कुल 455 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें से अब तक केवल 205 एकड़ 49 डिसमिल जमीन ही चिन्हित की जा सकी है। इसके अतिरिक्त 250 एकड़ भूमि की जरूरत को देखते हुए कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) अशोक कुमार मंडल ने माधोरामपुर और अंतीचक मौजा में उपलब्ध सरकारी भूमि का सर्वेक्षण कर प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजा है।
सरकारी जमीन को लैंड बैंक के रूप में उपयोग का सुझाव
एसडीएम द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में अनुशंसा की गई है कि इन सरकारी भूमियों को विश्वविद्यालय के लिए लैंड बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाए। उनके अनुसार, माधोरामपुर में 120 एकड़ और अंतीचक में 130 एकड़ सरकारी जमीन चिन्हित की गई है। यह क्षेत्र विक्रमशिला पुरातात्विक स्थल के आसपास स्थित है, जिससे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सांस्कृतिक महत्व को और बल मिलेगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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मुख्य सचिव ने किया था स्थल निरीक्षण, सरकार गंभीर
बिहार सरकार इस परियोजना को लेकर काफी गंभीर है। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने अंतीचक पहुंचकर विश्वविद्यालय निर्माण की तैयारियों की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने कार्यों की प्रगति का आकलन किया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
88 करोड़ रुपये की राशि अधिग्रहण के लिए उपलब्ध, फिर भी कार्य लंबित
केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए पहले चरण में अंतीचक मौजा में 88 एकड़ 99 डिसमिल और मलकपुर मौजा में 116 एकड़ 50 डिसमिल, कुल 205 एकड़ 49 डिसमिल भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है। इस भूमि के अधिग्रहण के लिए शिक्षा विभाग द्वारा लगभग ₹88 करोड़ की राशि भी पहले ही भागलपुर के जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी तक अटकी हुई है।
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सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट हो चुकी तैयार
इस परियोजना के लिए आवश्यक सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। अब गजट प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में रैयतों को मुआवजा राशि का भुगतान कर दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
एमपीए को दी गई नक्शा तैयार करने की जिम्मेदारी
भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी होते ही पब्लिक ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एमपीए) को विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का नक्शा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए योजना बद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।