देशभर में राजनीतिक खींचतान का विषय बने दादरी कांड और उसके बाद प्रमुख साहित्यकारों द्वारा लौटाए जा रहे पुरस्कारों के सिलसिले के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी चुप्पी तोड़ी।
शाह ने इस सारे घटनाक्रम से भाजपा का पल्ला झाड़ते हुए कहा कि साहित्यकारों द्वारा पुरस्कार लौटाने की वजह दादरी कांड और कलबुर्गी हत्याकांड है, ये दोनों ही घटनाएं सपा और कांग्रेस के शासन वाले राज्यों में हुई। और ये इन दोनों राज्यों की कानून व्यवस्था का मामला है जिसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।
विपक्षी दल जबरन इस मुद्दे को तूल देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार चुनावों के मद्देनजर पटना में प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पत्रकारों से बात कर रहे थे। जहा उन्हें काफी तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
इस दौरान भाजपा और आरएसएस के एक होने के सवाल को वह लगातार टालते रहे। इससे पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने बिहार में सरकार बनाने का दावा किया।
कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बिहार के लिए घोषित किए गए डेढ़ लाख करोड़ के विशेष पैकेज की वजह से विकास के लिए काफी संख्या में लोगों ने भाजपा को वोट दिया है। उन्होंने पहले चरण में भाजपा की 32 से 34 और दूसरे चरण में 22 से 24 सीटें जीतने का दावा किया।
दवाई, पढ़ाई कमाई के लिए भाजपा को वोट दें लोग
शाह ने बकायदा कारण गिनाते हुए कहा कि बिहार में काफी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने बदलाव और बिहार के विकास के लिए राजग को वोट दिया है। लोगों को दवाई, पढ़ाई और कमाई के लिए आज भी बिहार से बाहर जाना पड़ता है मैं लोगों से विनम्र अपील करता हूं कि वो बदलाव के लिए भाजपा को वोट दें।
हम यहां विकास के नए मापदंड स्थापित करेंगे। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे पिछड़े राज्यों ने भाजपा सरकार आने के बाद विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है।
झारखंड का उदाहरण देते हुए शाह ने कहा कि साल भर पहले वहां भाजपा सरकार आई है, तब विकास के मामले में झारखंड 34वे नंबर पर था और बिहार 29वें पर। भाजपा के राज में झारखंड आज अपना स्तर सुधारते हुए 29वें नंबर पर आ गया है जबकि बिहार अभी भी 27वें नंबर पर ही अटका हुआ है।
शाह ने फिर जंगलराज का मुद्दा उठाते हुए कहा बिहार की जनता 15 साल लालू का शासन देख चुकी है और पिछले दस सालों में उसने नीतीश का शासन भी देखा है इसलिए इस बार भाजपा को मौका मिलना चाहिए। बिहार की जनता ने लालू का जंगलराज देखा है इसलिए वह दोबार जंगलराज 2 नहीं देखना चाहती।
लालू पर बोलकर नहीं बिगाड़ सकता अपना स्तर
खासकर अति पिछडों और दलितों के लिए तो वो शासन दुस्वप्न की तरह था। संघ प्रमुख के आरक्षण की समीक्षा वाले सवाल पर शाह ने एक बार फिर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। कहा, भाजपा मौजूदा आरक्षण में किसी प्रकार के बदलाव के पक्ष में नहीं है।
पत्रकारों द्वारा यह पूछने पर की क्या आरएसएस और भाजपा एक पर उन्होंने गोलमोल जवाब ही दिया। बार बार पूछने पर वह झुंझलाते भी नजर आए। संगीत सोम, खट्टर और साक्षी महाराज के मुद्दे पर किए गए सवाल को भी अमित शाह बड़ी चतुराई से टाल गए।
वहीं लालू यादव के मोदी और उन पर दिए गए बयानों पर शाह ने कहा कि वह रोज कुछ न कुछ बोलते हैं मैं उस पर नहीं बोल सकता मेरा एक स्तर है। दाल की बढ़ती कीमतों को ठीकरा भी उन्होंने राज्य सरकारों पर ही फोड़ दिया।
शाह ने दावा किया कि छह महीने पहले कृषि मंत्री राधा मोहन ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर इस संबंध में कदम उठाने की बात कही थी लेकिन किसी मुख्यमंत्री ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।