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Bihar : मंदिरों में बलि पर रोक! धार्मिक न्यास बोर्ड का आदेश वायरल, अध्यक्ष बोले- रिकॉर्ड देखना होगा, भाजपा गरम

Mon, 18 Dec 2023 04:57 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News : दरभंगा के मां श्यामा मंदिर में बलि प्रथा पर रोक को लेकर हंगामे के बीच धार्मिक न्यास बोर्ड का एक आदेश वायरल है, जिसमें राज्य के सभी मंदिरों में बलि पर रोक लगाई गई है। 'अमर उजाला' ने इसपर बोर्ड अध्यक्ष से बात की तो जवाब कुछ अलग मिला।
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दरभंगा का मां श्याम मंदिर जहां से उठा है विवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में नवरात्र के समय देवी मां के सामने बलि की सनातन परंपरा चली आ रही है। कई मंदिर इसके लिए विख्यात हैं। इन मंदिरों की पहचान ही बलि से है। लेकिन, अब धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से राज्य के सभी मंदिरों में बलि प्रथा पर रोक के आदेश की बातें वायरल हो रही हैं। इन बातों के साथ वायरल हो रहा है धार्मिक न्यास पर्षद का अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन का एक पत्र। इस पत्र में दरभंगा के मां श्याम मंदिर में बलि प्रथा पर रोक की जानकारी है, लेकिन हकीकत यह है कि इसी पत्र के साथ यह जानकारी वायरल है कि पूरे बिहार के लिए इस तरह का आदेश आया है। पत्र की सत्यता जांचने के लिए 'अमर उजाला' ने अध्यक्ष अखिलेश जैन से बात की तो उन्होंने "मुझे रिकॉर्ड देखना होगा" कहकर कॉल काट दिया, जबकि न्यास बोर्ड के सदस्यों की मानें तो ऐसे आदेश पर सदस्यों से बात भी नहीं की जा रही। इस बीच, भाजपा ने इस मामले पर हंगामा शुरू कर दिया है।

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जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार। - फोटो : अमर उजाला
जदयू प्रवक्ता और बोर्ड सदस्य ने क्या बताई कहानी
जदयू के मुख्य प्रवक्ता कुमार नीरज ने अमर उजाला को बताया कि दरभंगा के श्यामा माय मंदिर में जयशंकर झा मंदिर की कमेटी में सदस्य हैं जिनके जिन्होंने धार्मिक न्यास बोर्ड को एक पत्र भेजकर इस मंदिर में बलि देने के लिए एक कर्मचारी की मांग कर दी। उस पत्र के आलोक में धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन ने पशु क्रूरता अधिनयम का हवाला देते हुए वहां कर्मचारी नियुक्ति की बात को इंकार कर दिया। कुमार नीरज ने कहा कि दरभंगा में भाजपा के कोई भी नेता इस मुद्दे पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर दरभंगा के लोग और वहां के भाजपा नेता दो धाराओं में बंट गए हैं। एक पक्ष बली के विरोध में है जबकि दूसरा पक्ष बली के समर्थन में। मैं कहता हूं कि धार्मिक न्यास बोर्ड एक स्वायत संस्था है लेकिन जो सदियों से परंपरा चल रही है उसे रोका जाना न्याय संगत नहीं है। लेकिन भाजपा अगर इसकी राजनीतिक आलोचना कर रही है तो भाजपा बताए कि उनके माननीय सदस्य रणवीर नंदन, हरीभूषण ठाकुर बचाओ और मोहन भागवत जिनके घर जाते हैं किशोर कुणाल साहब यह सब चुप क्यों है इस पर अपनी राय क्यों नहीं व्यक्त कर रहे हैं।
 

भाजपा विधायक हरीभूषण ठाकुर बचौल। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा विधायक और बोर्ड सदस्य यह कह रहे हैं
हरीभूषण ठाकुर बचौल ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान बताया कि हमारे चेयरमैन जैन समाज से हैं। इसमें अध्यक्षीय प्रणाली है जिसमें सदस्य का कुछ चलता नहीं है। अब मैं उसमें जाता भी नहीं हूं। हो सकता है ऐसा पत्र जारी किया गया हो। हमलोगों को तो बैठक में अब बुलाया भी नहीं जाता है। अब सरकार बदल गई है और मैं तो भाजपा का प्रतिनिधित्व करता था। जब मुझे बुलाया नहीं जाता है तो मैं भी अपने स्वाभिमान के कारण वहां नहीं जाता हूं। श्यामा माई मन्दिर में बली देना एक परंपरा है, संस्कृति है उसे अध्यक्ष महोदय नहीं बिगाड़ें। आप संस्था के संवर्धन के लिए बने हैं न कि नाश करने के लिए बने हैं। अध्यक्ष बिलकुल अपनी मनमानी करते हैं। हरीभूषण ठाकुर बचौल ने आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष सनातन संस्कृति को कमजोर करने के लिए सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं।
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भाजपा प्रवक्ता अरविन्द कुमार। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा प्रवक्ता ने बोर्ड अध्यक्ष और सरकार पर बोला हमला
भाजपा प्रवक्ता अरविन्द कुमार सिंह ने बोर्ड अध्यक्ष और सरकार पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक न्यास बोर्ड के द्वारा सिर्फ मंदिर में ही बलि प्रथा पर रोक लगाने का क्या कारण है। अगर रोक लगानी है तो बिहार में ही बलि प्रथा पर रोक लगा दिया जाए। हर जगह बिहार में चाहे कहीं भी बलि पड़ रहा हो, चाहे मंदिर हो या मस्जिद हो या ईद हो बकरीद हो हर जगह पशु हत्या पर प्रतिबंध होना चाहिए। मांस का जो बिक्री केंद्र है उन सब पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। हिम्मत है तो सार्वजनिक स्थल पर जो मांस बिक्री केंद्र है उस पर प्रतिबंध लगाए। सिर्फ मंदिरों में प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है क्योंकि धर्म विशेष लोगों का वोट बैंक लिया जा सके। उन्होने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि यह नीतीश सरकार का एक प्रोपेगेंडा है। अरविन्द कुमार ने कहा कि अगर हिम्मत है तो पूरे बिहार में पशु बलि पर ही प्रतिबंध लगाये। लेकिन ऐसा करने का हिम्मत बिहार सरकार को नहीं है। अगर यह लोग दूध पीया है तो ईद बकरीद में प्रतिबंध लगाकर दिखाएं लेकिन यह लोग वोट की राजनीति के लिए कुछ भी बेच देंगे।
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