कांग्रेस बिहार में न केवल अपना पुराना जनाधार वापस पाने का प्रयास रही है, बल्कि अपने पुराने कद्दावर नेताओं के वंशजों के लिए भी पार्टी का दरवाजा खोल दिया है। इसी क्रम में शनिवार को बिहार कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा का परिवार करीब 40 साल बाद कांग्रेस में लौट आया। ललित के पोते और जदयू के पूर्व विधायक ऋषि मिश्र ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा के हाथों प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
ऋषि मिश्र कांग्रेस में शामिल होने वाले अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी है। इस अवसर पर मिश्रा ने कहा कि नीतीश कुमार से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन भाजपा के साथ काम करना मुश्किल हो गया था। करीब एक साल से पार्टी में घुटन महसूस हो रही थी। अब राहुल गांधी के साथ करके अपना जीवन कांग्रेस को मजबूत करने में लगा दूंगा। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि कांग्रेस से इस परिवार का पुराना नाता है।
पार्टी के प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि भाजपा के कई सांसद कांग्रेस के संपर्क में हैं और पुराने कांग्रेसी भी अब घर वापसी पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भागवत झा आजाद के पुत्र कीर्ति झा आजाद और कांग्रेस की पूर्व मंत्री माधुरी सिंह के पुत्र उदय सिंह के भी कांग्रेस में लौटने पर बात चल रही है।
घर वापसी दरअसल गठबंधन में सीटों को लेकर फंसी पेंच का नतीजा है। दरभंगा के जाले विधानसभा सीट से विधायक रहे ऋषि मिश्रा ने चुनावी टिकट एडजस्टमेंट के लिहाज से पाला बदलने का फैसला लिया है। ऋषि मिश्रा विधानसभा उपचुनाव में तब विधायक चुने गए थे जब जदयू भाजपा के साथ नहीं था। 2015 के विधानसभा चुनाव में जाले विधानसभा सीट पर ऋषि मिश्रा महागठबंधन के उम्मीदवार थे और उन्हें भाजपा उम्मीदवार जीवेश मिश्रा ने पटखनी दी थी।
ऋषि की राजनीति उस वक्त संकट में आ गई जब जदयू -भाजपा का फिर से गठबंधन हो गया। ऐसे में जाले विधानसभा सीट पर ऋषि मिश्रा की दावेदारी एनडीए में रहते हुए नामुमकिन थी। लिहाजा अब उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामने का फैसला किया है।