परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों पर ही फोकस नहीं कर रहा है। बल्कि, राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में सीएनजी से चलने वाली बसों पर भी काम किया जा रहा है।
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पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया और इसे एक अच्छी शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में करीब 10 से 12 लाख वाहनों के चलने के पैमाने को देखते हुए यह सरकार की ओर से उठाया गया एक सकारात्मक कदम है।
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मौजूदा समय में भी राज्य में इलेक्ट्रिक बसों को चलाया जा रहा है। पूर्वी महानगर में करीब 80 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं। इन बसों को कैपेक्स मॉडल के तहत अधिग्रहित किया गया था। नई 1,180 बसों को ओपेक्स मॉडल के तहत अधिग्रहित किया जा रहा है।
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टाटा कंपनी की ओर से इन बसों के लिए कुछ सुविधाएं दी जाएंगी। इन बसों की खरीद के बाद कंपनी की ओर से ड्राइवर मुहैया करवाए जाएंगे। इन बसों में कंडक्टर डब्ल्यूबीटीसी के होंगे। जिन बसों को खरीदा गया है उनमें से करीब 750 बसें 12 मीटर लंबी होंगी जबकि बाकी बसों की लंबाई आठ मीटर होगी।
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