आराम के कारण आजकल कई लोग ऑटोमैटिक कारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इन कारों में गियर की जगह पी, आर, एन, डी और एस लिखा हुआ लीवर होता है। यह कैसे काम करता है। आइए जानते हैं।
जिस तरह कारों में नई तकनीक आ रही है, वैसे ही कारों को चलाने का अनुभव बेहतर हो रहा है और इसके साथ आराम भी बढ़ गया है। अगर आप भी ऑटोमैटिक कार को खरीदकर घर लाना चाहते हैं, तो हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि ऑटोमैटिक कार में पांच या छह गियर की जगह पी, आर, एन, डी और एस का क्या काम होता है।
विज्ञापन
ऑटोमैटिक कार की एबीसीडी
2 of 4
Automatic Car
- फोटो : For Reference Only
किसी भी ऑटोमैटिक कार को चलाना काफी आसान होता है। लेकिन कई लोग ऐसी कारों को चलाने से बचते हैं, क्योंकि इनमें मैनुअल कारों की तरह गियर नहीं होते बल्कि अंग्रेजी के शब्द होते हैं। यही कार की एबीसीडी होती है।
ऑटोमैटिक कारों में गियर की जगह लीवर पर पी, आर, एन, डी, एस लिखा होता है। अंग्रेजी के हर शब्द का अलग मतलब और काम होता है। पी का मतलब पार्किंग होता है। आर का मतलब रिवर्स, डी का मतलब ड्राइव और एस का मतलब स्पोर्ट्स मोड होता है। हालांकि एस मोड हर ऑटोमैटिक कार में नहीं मिलता, इसे सिर्फ कुछ खास कारों में ही ऑफर किया जाता है।
अगर आप ऑटोमैटिक कार को चलाना चाहते हैं तो यह काफी सुविधाजनक है। अगर आपको कार को पार्क करना है तो आप पी शब्द पर गियर लीवर का लाकर रोक सकते हैं। इससे कार पार्किंग मोड में आ जाएगी। वहीं अगर आपको कार चलानी है तो आप डी मोड में गियर लीवर को रखें, जिसके बाद कार को आसानी से चलाया जा सकता है। मैनुअल की तरह इसमें बार-बार गियर बदलने का झंझट नहीं होता। कार को रिवर्स करने के लिए सिर्फ आर के सामने गियर लीवर को लाने से ही आपका काम हो जाएगा। वहीं अगर आपकी कार में एस मोड है तो इसमें कार का गियर लीवर सेट करने के बाद इंजन से ज्यादा पावर मिलने लगती है। अगर आप किसी रेड लाइट या जाम में खड़े हुए हैं तो आप कार को एन मोड पर रखकर आराम कर सकते हैं। एन मोड पर आते ही कार न्यूट्रल हो जाती है और कार को आगे या पीछे नहीं किया जा सकता।