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क्या वाकई में कारों में आ रहे टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम हैं जानलेवा, जानिए क्या है सच

Tue, 24 Nov 2020 03:13 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Touchscreen Infotainment System - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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एक वक्त था जब कारें केवल बेसिक फीचर्स के साथ आती थीं और उन्हें उंगलियों पर गिना जा सकता था, लेकिन अब धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई जनरेशन की कारें अब फीचर्स के भरी हुई हैं। उनमें टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम से लेकर लेनवॉच कैमरा समेत एयर प्यूरीफायर जैसे फीचर आ रहे हैं। इनमें लोगों में सबसे ज्यादा क्रेज टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम का है जो 7 इंच से लेकर 10 इंच तक पहुंच चुके हैं। लेकिन क्या वाकई में  टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम की कारों में जरूरत है, यह बहस का विषय है।

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हादसे में क्षतिग्रस्त कार - फोटो : अमर उजाला

जान पर भारी

हाल ही में एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कारों में आने वाले ये टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम आपकी जान पर भारी पड़ सकते हैं। ब्रिटेन के एक चैरिटी ग्रुप आईएम रोडस्मार्ट (पूर्व नाम इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मोटरिस्ट्स) ने अपने एक शोध में दावा किया है कि ड्राइविंग के दौरान टचस्क्रीन सिस्टम का इस्तेमाल करना नशे में ड्राइविंग करने से भी ज्यादा खतरनाक है। संस्था ने कार ड्राइविंग और बाइक राइडिंग के दौरान रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स में सुधार के लिए यह शोध किया है।

Ford car Interior - फोटो : Ford (For Reference)

प्रतिक्रिया समय घटता है

आईएम ने एफआईए रोड सेफ्टी ग्रांट प्रोग्राम और रीस जेफ्रीज़ रोड फंड के साथ यह अध्ययन किया है। शोध में खुलासा हुई है कि मॉडर्न टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम्स और टच बेस्ड कंट्रोल सरफेस से ड्राइवर का प्रतिक्रिया समय घटता है, जिससे उसका ध्यानाकर्षण होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर नशे में कोई ड्राइव कर रहा हो तो उसका प्रतिक्रिया का समय 2-3 गुना तक धीमा हो जाता है।
 
 

ड्राइविंग के दौरान मास्क की आवश्यकता - फोटो : iStock

एकाग्रता भंग होती है

शोध के मुताबिक हम सभी जानते हैं कि नशे में ड्राइविंग कितनी खतरनाक हो सकती है, लेकिन यहां कुछ ऐसी तकनीक हैं जो संभावित रूप से और भी खतरनाक हैं और कोई भी इसके बारे में बात नहीं करना नहीं चाहता है। इसके बावजूद ऑरिजनल इक्विमेंट मैन्यूफैक्चर्स डिजिटलाइजेशन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। शोध में पता चला है कि जब ड्राइवर कार में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम पर कुछ कर रहा होता है तो लेन में वाहन की पोजिशन को कंट्रोल करने, एक नियत रफ्तार बनाए रखने और सामने की तरफ देखने में दिक्कत आती है। वहीं यह भी खुलासा हुआ कि ड्राइवर प्रतिक्रिया देने में विफल रहे जबकि सड़क पर उनकी रफ्तार सामान्य से भी धीमी थी।       
 
 
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Honda City alexa support - फोटो : Honda Cars (For Reference Only)

वॉयस बेस्ड इंटरेक्शन सिस्टम ज्यादा कारगर

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब आधुनिक टचस्क्रीन सिस्टम की खामियों को लेकर कोई स्टडी की गई हो। भले यह शोध ब्रिटेन में किया गया है लेकिन इसके परिणाम और निष्कर्ष पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं। वहीं टचस्क्रीन पर हाथ इस्तेमाल करने की बजाय वॉयस बेस्ड इंटरेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि इससे ड्राइविंग के दौरान एकाग्रता कम भंग होती है। वॉयस बेस्ड इंटरेक्शन सिस्टम का फीचर अब ज्यादातर सिस्टम में दिया जा रहा है। हालांकि कुछ मामलों में टचस्क्रीन सिस्टम बेहद कारगर हैं लेकिन हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम कंट्रोल्स (HVAC) के इस्तेमाल के दौरान मुश्किल पैदा करते हैं और ड्राइविंग से ध्यान भटकाते हैं।  
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