ऑस्टिन में एक छोटा लेकिन अहम लॉन्च
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मशहूर ऑटोमोटिव एनालिस्ट एडम जोनस ने बताया कि टेस्ला ने इस पायलट प्रोजेक्ट को अमेरिका के ऑस्टिन शहर में हरी झंडी दे दी है। लेकिन इसका दायरा बेहद छोटा होगा। उनकी जानकारी के अनुसार, शुरुआती फ्लीट में सिर्फ 10 से 20 गाड़ियां होंगी, जो पब्लिक रोड्स पर चलेंगी। हालांकि, इन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को ही होगी। जैसे टेस्ला के इनसाइडर, शुरुआती यूजर्स, या फिर कंपनी से जुड़े लोग।
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Tesla Robotaxi Cybercab
- फोटो : Tesla
सुरक्षा पर जोर, दिखावे से दूरी
हालांकि एलन मस्क के पुराने वादों की तुलना में यह शुरुआत थोड़ी धीमी और सतर्क लग सकती है, लेकिन इसका मकसद साफ है- सुरक्षा पहले। पूरी दुनिया में सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी को लेकर कई सवाल और चिंताएं हैं, इसलिए टेस्ला कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने टेलीऑपरेशन्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया है। मतलब अगर किसी वजह से गाड़ी को खुद से कंट्रोल नहीं किया जा सका, तो दूर बैठे इंसान इसे तुरंत संभाल सकते हैं।
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ये अभी कोई क्रांति नहीं है
सबसे दिलचस्प बात ये है कि टेस्ला की ये नई शुरुआत, उसके पहले से चल रहे प्रयोगों जैसी ही है। ऑस्टिन और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में पहले से ही टेस्ला की गाड़ियां ट्रायल मोड में टैक्सी सर्विस दे रही हैं। बस फर्क इतना है कि अब गाड़ी के ड्राइवर की भूमिका इंसान शायद दूर से निभाएगा, बजाय उसके कि वो गाड़ी में मौजूद हो।
इस लॉन्च की तैयारी के लिए टेस्ला ने ग्राउंड ट्रुथ मशीन नाम की एक खास तकनीक का सहारा लिया है। यह सिस्टम लिडार और रडार की मदद से शहर की सड़कों को बहुत ही बारीकी से मैप कर रहा है। ताकि गाड़ियां रास्तों को ज्यादा अच्छे से समझ सकें और सुरक्षित तरीके से चल सकें।
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छोटे कदम, लेकिन बड़ा सपना
टेस्ला का ये धीरे-धीरे और संभलकर बढ़ना दिखाता है कि कंपनी इस नई तकनीक से जुड़े जोखिमों को अच्छी तरह समझती है। गाड़ियों की संख्या सीमित रखना, रिमोट मॉनिटरिंग का इंतजाम करना, और इनविटेशन-ओनली एक्सेस देना। ये सब दर्शाता है कि कंपनी बेहद सोच-समझकर आगे बढ़ रही है।
भले ही ये वो रोबोटैक्सी क्रांति नहीं है जिसकी कल्पना की गई थी। लेकिन ये उसी सफर का पहला और जरूरी कदम जरूर है।
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