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वाहनों की चोरी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, QR कोड से ऐसे मिलेगी मदद

Tue, 30 Jul 2019 10:29 AM IST
शिल्पा ठाकुर ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo
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पहले के मुकाबले आज के समय में लोग अपने वाहनों को लेकर अधिक चिंतित हो गए हैं। वाहनों की चोरी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कई बार चोर वाहन को तो छोड़ देते हैं लेकिन उसके सभी पार्ट्स चोरी कर लेते हैं। ऐसे में सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। जिससे इन चोरी के मामलों में कमी लाई जा सके।  ऐसा अक्तूबर से होना शुरू हो जाएगा। दरअसल अक्तूबर के बाद जो भी वाहन बनेंगे उनके प्रमुख पार्ट्स में क्यूआर कोड जरूरी हो जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय सितंबर में सभी वाहन निर्माताओं को निर्देश जारी करेगा।  

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कैसे मदद करेगा कोड?

सामान्य तौर पर ये कोड दिखाई नहीं देगा। लेकिन इसे अल्ट्रावॉलेट किरणों की मदद से देखा और जांचा जा सकेगा। इससे फायदा ये होगा कि वाहन की पहचान उसके मालिक से की जा सकेगी।
 
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  चोरी रोकने में मिलेगी मदद

देश में प्रतिवर्ष 2.5 लाख से अधिक वाहनों की चोरी होती है। ऐसे में अगर इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से एक वाहन का पार्ट चोरी करके उसे दूसरे वाहन में डाला जाएगा, तो चोरी पकड़ ली जाएगी। इससे वाहनों के पार्ट्स की चोरी को खत्म किया जा सकेगा। वर्तमान में इंजन और चेसिस के अलावा अन्य पार्टस की पहचान नहीं की जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यही दो पार्ट्स ऐसे हैं, जिनमें नंबर दर्ज होते हैं। इस नियम के लागू होने के बाद से वाहनों के महंगे पार्ट्स पर निर्माता क्यूआर कोड प्रिंट करेंगे। जिसमें इंजन और चेसिस का नंबर भी दर्ज होगा। बता दें किसी भी वाहन की बिक्री के बाद रजिस्टर्ड करते वक्त वाहन मालिक के साथ-साथ चेसिस और इंजन नंबर भी दर्ज किया जाता है।
 
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