वैश्विक व्यापार युद्ध का भी असर
दस्तावेजों में मरेली ने कहा कि वैश्विक ट्रेड वॉर का उसके लिक्विडिटी यानी नकद प्रवाह पर बड़ा असर पड़ा है। कंपनी के कारोबार का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पर निर्भर है और ऑटो सेक्टर पर लगे टैक्स ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
नए कर्जदाता बन सकते हैं मालिक
मरेली ने कहा कि नए 1.1 अरब डॉलर कर्ज देने वाले लेनदार कंपनी की चैप्टर 11 प्रक्रिया पूरी होने के बाद मालिक बन सकते हैं। हालांकि इसके लिए 45 दिन का "ओवरबिड प्रोसेस" भी रखा गया है, जिसमें दूसरी पार्टियां भी बोली लगा सकती हैं।
कोर्ट में दायर दस्तावेजों के मुताबिक, मरेली की कुल संपत्ति और देनदारियां दोनों ही 1 अरब से 10 अरब डॉलर के बीच हैं।
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जापानी और विदेशी कर्जदाताओं के बीच बनी सहमति
यह दिवालिया प्रक्रिया उन दो विरोधी कर्जदाता समूहों - जापानी बैंकों और एड हॉक ग्रुप ऑफ सीनियर लेंडर्स - के बीच जारी गतिरोध को भी तोड़ती है।
जापान के तीसरे सबसे बड़े बैंक मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप ने बताया कि उसने मरेली को 237.6 अरब येन (लगभग 1.64 अरब डॉलर) का कर्ज दिया था। लेकिन वह पहले से ही इसके लिए प्रावधान कर चुका है और कंपनी के दिवालिया होने से उसके मुनाफे पर कोई बड़ा असर नहीं होगा।
निसान का समर्थन जारी रहेगा
निसान ने मरेली के इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि वह मरेली और अन्य ग्राहकों के साथ मिलकर सप्लाई चेन में कोई बाधा न आने देने की कोशिश करेगा।
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दो बड़ी कंपनियों के विलय से बनी थी मरेली
मरेली की स्थापना 2019 में मैग्नेती मरेली और जापान की कैलसोनिक कांसेई के विलय से हुई थी। फिएट क्रिसलर (FCA), जो अब स्टेलेंटिस का हिस्सा है, ने मैग्नेती मरेली को कैलसोनिक कांसेई को 5.8 अरब यूरो में बेचा था, जो केकेआर के स्वामित्व में है।
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भारतीय कंपनी मदरसन का भी प्रस्ताव आया था
हाल ही में निक्केई अखबार ने रिपोर्ट दी थी कि भारतीय कंपनी मदरसन ग्रुप ने मरेली के अधिग्रहण के लिए एक प्रस्ताव रखा था। लेकिन यह सौदा जापानी और विदेशी कर्जदाताओं के मतभेद की वजह से सफल नहीं हो सका।
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