भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर के हाईवे पर एक जीपीएस-आधारित टोल संग्रह प्रणाली शुरू करने की संभावना का पता लगाने के लिए एक अध्ययन शुरू किया है।
एनएचएआई ने शीर्ष अधिकारी ने कहा, "इस सिस्टम में, मोटर चालकों को भुगतान करने के लिए टोल प्लाजा पर इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। और न ही उन्हें हाईवे के पूरे हिस्से के लिए भुगतान करना होगा। टोल शुल्क सिर्फ जीपीएस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके तय की गई दूरी के लिए तय किया जाएगा। इस सिस्टम को लागू करने के लिए, हम ट्रैफिक, राजस्व, वाहन-उपयोगकर्ताओं के व्यवहार आदि पर डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।"
विशेषज्ञ जीओ-फेनसिंग के जरिए मोटर चालकों द्वारा तय की गई दूरी की गणना करने के लिए एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम विकसित कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि टोल कलेक्शन के संबंध में बैंकों के साथ चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, "हमने भारत भर में पांच हाईवे का चयन किया है। जिनमें बंगलूरू-मैसूरू एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे भी शामिल है। जहां जीपीएस-आधारित टोल संग्रह प्रणाली लागू की जाएगी।"
यह प्रणाली पायलट आधार पर पांच राजमार्गों में से एक पर शुरू की जाएगी। जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चुना जाएगा। पायलट परियोजना के नतीजे के आधार पर, इसे अन्य चार हाईवे तक बढ़ाया जाएगा।" अधिकारी ने बताया कि यह जीपीएस-आधारित टोल संग्रह प्रणाली जल्द ही टोल प्लाजा-आधारित प्रणाली को बदल देगी।