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FASTag Annual Pass: दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे पर लगभग 30% निजी कारें इस्तेमाल कर रही हैं वार्षिक फास्टैग पास

Tue, 26 Aug 2025 04:15 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-चंडीगढ़ राजमार्ग पर चलने वाली लगभग 30 प्रतिशत निजी कारें और जीपें फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग कर रही हैं। जो देश में एनएच नेटवर्क पर टोल भुगतान के लिए नई योजना की हिस्सेदारी से तीन गुना अधिक है।
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इलेक्ट्रिक ट्रक - फोटो : AI
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विस्तार
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दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे पर यात्रा करने वाली लगभग 30 प्रतिशत निजी कारें और जीपें अब फास्टैग वार्षिक पास का इस्तेमाल कर रही हैं। यह आंकड़ा देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लिए नए टोल भुगतान योजना के औसत से तीन गुना अधिक है।
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वार्षिक पास की बढ़ती लोकप्रियता
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) के सदस्य विशाल चौहान ने बिल्ड इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में बताया, "हमें उम्मीद है कि मंगलवार तक निजी कारों और जीपों की संख्या, जो वार्षिक पास खरीद रही हैं, 10 लाख तक पहुंच जाएगी।

इस योजना को रोलआउट करने में कोई समस्या नहीं आई है। यह योजना उन यात्रियों को राहत देने के लिए बनाई गई है जो अक्सर हाइवे का इस्तेमाल करते हैं।" इस कार्यशाला में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय सड़क परिवहन सचिव वी उमाशंकर भी मौजूद थे।

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गडकरी का फोकस: गुणवत्ता और जवाबदेही
गडकरी ने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि अच्छे सेवा के लिए लोगों को भुगतान करना चाहिए, लेकिन यह एनएचएआई और अन्य हाइवे संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें। अगर हम अच्छी सेवा नहीं देंगे लेकिन टोल वसूलेंगे, तो आलोचना होगी।

मैं अपने अधिकारियों को निर्देश दे रहा हूं कि हाइवे के प्रत्येक हिस्से पर ठेकेदारों, अधिकारियों और दोष जिम्मेदारी अवधि की जानकारी प्रदर्शित करें, ताकि वे भी जिम्मेदार ठहराए जा सकें।" उन्होंने गुणवत्ता वाले प्रोजेक्ट की तैयारी और निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

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भविष्य की चुनौतियों का उदाहरण
सड़क परिवहन सचिव वी उमाशंकर ने गुरुग्राम के NH-48 प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए बताया कि "हाइवे प्रोजेक्ट रिपोर्ट में भविष्य की समस्याओं का अनुमान नहीं लगाया गया था और यह भी नहीं माना गया था कि लोगों के सुरक्षित और पर्याप्त क्रॉसिंग की आवश्यकता होगी, क्योंकि हाइवे शहर को दो हिस्सों में विभाजित करता है।" उन्होंने बताया कि इसके चलते एनएचएआई को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। 

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