क्या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
हां, लोक अदालत में शामिल होने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के सीधे अदालत पहुंचने वालों के मामलों पर सुनवाई नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आवेदक को एक टोकन नंबर और अपॉइंटमेंट लेटर जारी किया जाता है, जिसमें सुनवाई का समय, तारीख और अदालत परिसर की जानकारी होती है। मामलों की सुनवाई केवल टोकन नंबर के क्रम में ही की जाती है।
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ट्रैफिक चालान सेटल करने की प्रक्रिया क्या है?
लोक अदालत में ट्रैफिक चालान निपटाने के लिए एक तय प्रक्रिया अपनानी होती है।
- सबसे पहले वाहन मालिक को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस या परिवहन पोर्टल पर जाकर अपने लंबित चालानों की जानकारी जांचनी होगी।
- इसके बाद यह देखना जरूरी है कि चालान लोक अदालत के लिए पात्र है या नहीं, क्योंकि केवल छोटे और कंपाउंडेबल मामलों को ही शामिल किया जाता है।
- पात्र होने पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है और सारी जानकारी सावधानी से भरनी चाहिए।
- रजिस्ट्रेशन के बाद टोकन और अपॉइंटमेंट स्लिप डाउनलोड कर प्रिंट निकालना जरूरी है।
- 10 जनवरी को निर्धारित अदालत परिसर में समय से पहले पहुंचकर सुनवाई में शामिल होना होगा।
- लोक अदालत की बेंच मामले की सुनवाई करती है और तय करती है कि जुर्माना माफ होगा या कम किया जाएगा।
- यदि समझौता हो जाता है, तो उसी दिन तय की गई राशि जमा करनी होती है और चालान सिस्टम से बंद कर दिया जाता है।
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लोक अदालत की सुनवाई के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
सुनवाई के दिन वाहन चालकों को सभी जरूरी दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।
- वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- ड्राइविंग लाइसेंस
- वाहन बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र
- संबंधित चालान की प्रति
- टोकन नंबर और अपॉइंटमेंट लेटर
अदालत परिसर में प्रिंटिंग की सुविधा नहीं होगी, इसलिए सभी कागजात पहले से तैयार रखना जरूरी है।
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कौन से ट्रैफिक चालान लोक अदालत में निपटाए जा सकते हैं?
लोक अदालत में आम तौर पर छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों को शामिल किया जाता है।
- हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना
- रेड लाइट जंप करना
- गलत पार्किंग
- ओवरस्पीडिंग
- प्रदूषण प्रमाण पत्र न होना
- ट्रैफिक संकेतों की अनदेखी
- नंबर प्लेट से जुड़ी गड़बड़ियां
कुछ मामलों में गलत तरीके से जारी चालान भी सेटल किए जा सकते हैं।
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किन मामलों में चालान माफ नहीं होगा?
गंभीर ट्रैफिक अपराध लोक अदालत के दायरे में नहीं आते।
- शराब पीकर गाड़ी चलाना
- हिट एंड रन या जानलेवा दुर्घटनाएं
- नाबालिग द्वारा वाहन चलाना
- गैरकानूनी रेसिंग
- आपराधिक मामलों से जुड़े वाहन
- पहले से नियमित अदालत में लंबित केस
- दिल्ली के बाहर जारी किए गए चालान
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दिल्ली में लोक अदालत कहां-कहां लगेगी?
10 जनवरी को लोक अदालत दिल्ली के सभी प्रमुख जिला अदालत परिसरों में आयोजित की जाएगी। इसमें पटियाला हाउस, तिहाड़ हजारी, कड़कड़डूमा, साकेत, रोहिणी, द्वारका, राउज एवेन्यू सहित अन्य जिला अदालतें शामिल हैं।
लोक अदालत आम अदालत से कैसे अलग है?
लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मामलों का निपटारा जल्दी होता है। अधिकतर मामलों में एक ही दिन में सुनवाई और फैसला हो जाता है। जुर्माने में राहत मिल सकती है और लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकता है। हालांकि, केवल वही मामले सुने जाते हैं जो आधिकारिक पोर्टल पर सूचीबद्ध हों और जिनके लिए पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया हो।
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