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Scrapping: भारत में वाहन स्क्रैपिंग की रफ्तार कितनी तेज हुई? गडकरी ने बताए कितने निजी-सरकारी वाहन हुए स्क्रैप

Fri, 09 Jan 2026 08:43 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस प्रोग्राम में पहले ही 27 अरब रुपये का प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट आ चुका है। मंत्री के अनुसार, भारत का इम्पोर्टेड स्क्रैप मटीरियल 60 लाख टन है।
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Vehicle Scrapping - फोटो : Freepik
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विस्तार
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि दिसंबर 2025 तक देश की वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत करीब 4 लाख वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं। उन्होंने इसे भारत में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम बताया। अब तक कुल 3.94 लाख वाहनों को स्क्रैप किया गया है, जो नीति के तेजी से जमीन पर उतरने का संकेत देता है।
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इनमें सरकारी और निजी वाहनों की हिस्सेदारी क्या है?
स्क्रैप किए गए कुल वाहनों में से लगभग 1.65 लाख वाहन सरकारी विभागों के थे, जबकि करीब 2.39 लाख वाहन निजी स्वामित्व वाले थे। इससे यह साफ होता है कि नीति का असर सिर्फ सरकारी बेड़े तक सीमित नहीं है। बल्कि आम वाहन मालिक भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।

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Tata Motors vehicle scrapping facility - फोटो : Tata Motors
निजी निवेश और संसाधन पुनर्प्राप्ति में क्या प्रगति हुई है?
गडकरी के अनुसार, इस नीति के चलते अब तक करीब 27 अरब रुपये का निजी निवेश आकर्षित हुआ है। भारत हर साल लगभग 60 लाख टन स्क्रैप सामग्री आयात करता है। जिसमें से अब तक 3.76 लाख टन स्क्रैप स्टील की रिकवरी की जा चुकी है। यह करीब 6 प्रतिशत की रिकवरी दर को दर्शाता है।

स्क्रैपिंग प्रक्रिया के जरिए स्टील, लेड, एल्युमिनियम, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसे महत्वपूर्ण धातुएं फिर से हासिल हो हो रही हैं, जो आमतौर पर आयात पर निर्भर रहती हैं। इससे देश की आयात निर्भरता घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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इस नीति से अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को क्या लाभ हो रहा है?
मंत्री ने कहा कि वाहन स्क्रैपिंग नीति से लगभग 40,000 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही पूरी वैल्यू चेन में करीब 70 लाख नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

उन्होंने यह भी बताया कि कच्चे माल के फिर से इस्तेमाल करने की दर अब 33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 6,353 किलो टन की कमी आई है। यह प्रभाव पर्यावरण के लिहाज से लगभग 26 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है।

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Vehicle Scrapping - फोटो : Freepik
सरकार इस पहल को कैसे देख रही है?
गडकरी ने इस नीति को 'वेस्ट टू वेल्थ' पहल करार देते हुए कहा कि एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों की स्क्रैपिंग से बेकार संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलती है, बल्कि भारत की सर्कुलर इकोनॉमी भी और मजबूत होती है। 

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