एक्सप्रेस वे पर कार चलाना शहर और अन्य सड़कों पर कार चलाने के मुकाबले थोड़ा अलग होता है। एक्सप्रेस वे पर कार चलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो मंजिल तक सुरक्षित पहुंचा जा सकता है।
देशभर में कई एक्सप्रेस वे शुरू हो गए हैं और कुछ एक्सप्रेस वे काफी जल्द शुरू हो जाएंगे। अगर आप भी एक्सप्रेस वे पर कार को चलाकर जाना चाहते हैं तो हम आपको इस खबर में ऐसे पांच टिप्स बता रहे हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए आप बिना किसी परेशानी सुरक्षित रहते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।
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- फोटो : सोशल मीडिया
शहर के साथ ही अन्य सड़कों के मुकाबले एक्सप्रेस वे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा काफी ज्यादा रखी जाती है। अधिकतर एक्सप्रेस वे पर वाहनों के लिए गति सीमा 80 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। वहीं शहरों में यह सीमा 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है।
आमतौर पर एक्सप्रेस वे पर कम से कम चार लेन होती हैं। इनमें से सबसे लेफ्ट साइड की लेन ट्रकों के लिए होती है, जिनकी अधिकतम स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। लेफ्ट से दूरी लेन बसों के लिए होती है जिनकी अधिकतम स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। इसके बाद लेफ्ट से तीसरी लेन कारों के लिए रखी जाती है, जिसमें 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से कार चलाई जा सकती है। वहीं चौथी और राइट साइड की लेन को ओवरटेक के लिए रखा जाता है।
जब भी आपको किसी वाहन को ओवरटेक करना हो तो हमेशा ओवरटेक के लिए बनाई गई लेन में जाकर ही ओवरटेक करना चाहिए। ओवरटेक करने से पहले अगर पास के सिग्नल के साथ ही हॉर्न भी दिया जाए तो आगे चल रही कार के ड्राइवर को इस बात की जानकारी हो जाती है कि आप ओवरटेक करना चाहते हैं, जिसके बाद आप आसानी से सुरक्षित रहते हुए ओवरटेक कर सकते हैं।
एक्सप्रेस वे पर आपको जब भी अपनी लेन छोड़कर दूसरी लेन में जाना हो तो हमेशा पहले इस बात का ध्यान रखें कि आपके पीछे कोई दूसरा वाहन ना आ रहा हो। अगर दूसरा वाहन सुरक्षित दूरी पर है तो आप पहले इंडीकेटर दें और फिर लेन बदलें। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके पीछे आ रहे वाहन को इंडीकेटर देने के कारण इस बात की जानकारी मिल जाएगी कि आप किस लेन में जाने वाले हैं जिससे वह सुरक्षित दूरी बनाएगा और हादसा होने का खतरा खत्म हो जाएगा।
चूंकि एक्सप्रेस वे को काफी बेहतर तरीके से चलने के लिए बनाया जाता है। इन पर सफर के दौरान तेज स्पीड होती है और लगातार सावधानी बरतनी पड़ती है। जिससे ड्राइवर को थकान भी हो जाती है। ऐसे में हर 70 से 100 किलोमीटर के बाद कुछ देर के लिए ब्रेक लेना आपके साथ ही कार के लिए भी फायदेमंद रहता है।