कर्नाटक की पहली पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी) (आरवीएसएफ) देवनहल्ली में लगाई जाएगी। देश में 60 से ज्यादा आरवीएसएफ हैं, यह राज्य में पहला होगा। आने वाले दिनों में, सभी सरकारी वाहन जो 15 वर्ष से ज्यादा पुराने हैं और जो फिटनेस टेस्ट पास नहीं करते हैं, उन्हें आरवीएसएफ में स्क्रैप कर दिया जाएगा।
कर्नाटक की पहली पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी) (आरवीएसएफ) देवनहल्ली में लगाई जाएगी। देश में 60 से ज्यादा आरवीएसएफ हैं, यह राज्य में पहला होगा। आने वाले दिनों में, सभी सरकारी वाहन जो 15 वर्ष से ज्यादा पुराने हैं और जो फिटनेस टेस्ट पास नहीं करते हैं, उन्हें आरवीएसएफ में स्क्रैप कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
राज्य परिवहन विभाग ने महिंद्रा एमएसटीसी रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड को स्क्रैपिंग सुविधा स्थापित करने की मंजूरी दे दी है, जहां जनता स्वैच्छिक आधार पर पुराने अनफिट वाहनों को स्क्रैप कर सकती है। परिवहन आयुक्त योगीश ए.एम. ने कहा, "सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 2021 में स्वैच्छिक वाहन-बेड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसका मकसद पुराने असुरक्षित, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उन्हें नए, सुरक्षित और ईंधन-कुशल वाहनों सेबदलने के लिए एक इकोसिस्टम बनाना है।"
Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
उन्होंने कहा, "वाहन स्क्रैपेज नीति सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद है - यह राज्य की सड़कों से अनुपयुक्त और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए एक इकोसिस्टम बनाती है, और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, अत्याधुनिक स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग यूनिट्स की जरूरत है।"
Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
उन्होंने कहा, नियम कहता है कि वाहनों को सिर्फ आरवीएसएफ में ही स्क्रैप किया जा सकता है और यह असंगठित क्षेत्र के स्थानीय स्क्रैप डीलरों के पास नहीं जाएगा, जो यह काम अवैज्ञानिक तरीके से करते थे। विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि कर्नाटक में लगभग 15 लाख वाहन स्क्रैपिंग के लिए उपयुक्त हैं।
विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि स्क्रैपिंग नीति से भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि आरटीओ को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेबल के नीचे लेनदेन बढ़ेगा और बिचौलिए बढ़ेंगे। और साथ ही मांग की है कि सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना चाहिए।
Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
उत्सर्जन पर्यावरण के लिए खतरा है
इको-वॉच के निदेशक अक्षय हेबलीकर ने कहा, "दुनिया जलवायु संकट के गंभीर खतरे में है। भारत ने 2021 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में 2070 तक नेट-जीरो (शुद्ध-शून्य) उत्सर्जन तक पहुंचने का वादा किया है। इसे स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने, निजी वाहनों की तुलना में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ ईंधन-कुशल वाहनों को अपनाना जैसे कुछ सख्त कदम उठाकर ही हासिल किया जा सकता है। इसलिए, 15 साल पुराने और अनफिट वाहनों को खत्म करना एक अच्छा कदम है।"
Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
वाहनों द्वारा उत्सर्जित विभिन्न प्रकार की गैसों पर विवरण साझा करते हुए जो मनुष्यों और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, हेबलीकर ने कहा, "कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) वाहन के टेलपाइप उत्सर्जन के प्राथमिक घटकों में से एक है। अनुमान है कि दुनिया के प्रत्यक्ष CO2 उत्सर्जन में मोटर वाहनों का योगदान लगभग 24 प्रतिशत है। हालांकि इनसे कोई तात्कालिक स्वास्थ्य खतरा पैदा नहीं होता है, लेकिन इनका बढ़ता जमाव ग्लोबल वार्मिंग को उत्प्रेरित करता है, जिससे जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शरीर की ऑक्सीजन अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। अध्ययनों में पाया गया है कि वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान CO2 उत्सर्जन में 86 प्रतिशत की गिरावट आई है। परिवहन क्षेत्र भारत के पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) प्रदूषण में एक तिहाई योगदान देता है।"
उत्सर्जन को कम करने के अलावा, पुराने वाहनों से स्क्रैप सामग्री इस्पात उद्योग के लिए सस्ते कच्चे माल का विकल्प बन जाती है। उन्होंने बताया कि पुराने वाहनों से स्क्रैप धातु का इस्तेमाल करने से एक सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) बनाने में मदद मिलती है और इस्पात उद्योग को बढ़ावा मिलता है।
पुराने और अनुफिट वाहनों को हटाने से निश्चित रूप से वाहन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी जो पर्यावरण के लिए खतरा है। इससे काफी ईंधन बचाने में भी मदद मिलेगी क्योंकि नए वाहनों में बेहतर टेक्नोलॉजी हैं और वे ज्यादा ईंधन-कुशल हैं। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों के रखरखाव की लागत और संसाधन नए वाहनों की तुलना में बहुत ज्यादा है। हेबलीकर ने कहा, "सभी पुराने वाहन 'अनफिट' नहीं हैं। उत्सर्जन नियंत्रण के साथ अच्छी तरह से रखरखाव किए गए कई वाहनों को स्क्रैप करने की जरूरत नहीं है।"