कर्नाटक उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) निर्माताओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया था।
इस साल अगस्त में राज्य सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया है कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों पर एचएसआरपी लगाई जानी चाहिए। अगस्त में अधिसूचना में ऐसे सभी वाहनों को 17 नवंबर, 2023 तक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाना अनिवार्य था। यानी अधिसूचना से 90 दिनों के भीतर।
High security number plate
- फोटो : For Reference Only
एकल न्यायाधीश के समक्ष याचिकाओं में दावा किया गया था कि 20 एचएसआरपी निर्माताओं में से सिर्फ चार को लाइसेंस दिया गया था। 20 सितंबर को, एकल न्यायाधीश ने सरकारी आदेश पर रोक नहीं लगाई थी। लेकिन ज्यादा निर्माताओं के लिए समयबद्ध अनुमोदन प्रक्रिया का आदेश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें सभी वाहनों के लिए एचएसआरपी लागू करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की गई थी।
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सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता विक्रम हुइलगोल ने एकल न्यायाधीश के आदेश के बारे में अदालत को जानकारी दी। उन्होंने यह भी जिक्र किया गया कि इस आदेश को चुनौती दी गई है और एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है।
डिवीजन बेंच ने कहा कि वह एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ जनहित याचिका और अपील दोनों पर सुनवाई करेगी। और एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई 22 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।