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Ford: क्या फोर्ड मोटर कंपनी भारत में वापस आ रही है? जानें इस मामले में क्या है नई जानकारी

Wed, 11 Sep 2024 07:40 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऐसा लग रहा है कि  Ford Motor Company (फोर्ड मोटर कंपनी) गंभीरता से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में वापसी करने पर विचार कर रही है।
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Ford Car - फोटो : Ford
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विस्तार
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ऐसा लग रहा है कि  Ford Motor Company (फोर्ड मोटर कंपनी) गंभीरता से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में वापसी करने पर विचार कर रही है। ताकि दक्षिणी राज्य तमिलनाडु को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका स्थित प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता फोर्ड ने दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ राज्य में वाहन उत्पादन फिर से शुरू करने पर चर्चा की थी।
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यह कदम फोर्ड की नई भारत रणनीति का हिस्सा है। और प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ होने के कारण 2021 में भारतीय यात्री कार बाजार से बाहर निकलने के बाद कंपनी के लिए प्रभावी रूप से एक यू-टर्न का प्रतीक है। हालांकि इसने पहले बाजार में औसत से कम प्रदर्शन किया था, फिर भी कंपनी अपनी क्षमता पर आशावादी बनी हुई है। और उसे लगता है कि तमिलनाडु निर्यात के लिए मैन्युफेक्चरिंग बेस (विनिर्माण आधार) स्थापित करने के लिए आदर्श स्थान है। 

मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, "फोर्ड मोटर्स की टीम के साथ बहुत ही आकर्षक चर्चा हुई! तमिलनाडु के साथ फोर्ड की तीन दशक पुरानी साझेदारी को फिर से शुरू करने की व्यवहार्यता का पता लगाया, ताकि फिर से तमिलनाडु में दुनिया के लिए बनाया जा सके!"

रिपोर्ट्स के अनुसार, फोर्ड चेन्नई में मौजूदा प्लांट के लिए सभी विकल्पों को तौल रही है। कंपनी ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन प्लांट को फिर से इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखती है। वास्तव में, यह कंपनी की इलेक्ट्रिक होने और स्थायी परिवहन विकल्पों की बढ़ती मांग का फायदा उठाने की वैश्विक रणनीति के अनुरूप होगा। 

Ford Bronco - फोटो : Ford
भारत से फोर्ड का बाहर जाना
फोर्ड दशकों से भारत में मौजूद था, लेकिन कई वर्षों की रणनीतिक गलतियों और बाजार की गलत व्याख्या के कारण आखिरकार उसे हार का सामना करना पड़ा। फोर्ड की बाहर निकलने की इसकी योजना में धीरे-धीरे बंद करना शामिल था, जिसमें 2021 के आखिर तक स्थानीय बिक्री और निर्यात विनिर्माण को तुरंत बंद करना शामिल था। भारत में फोर्ड के संचालन के जरिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 4,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ था। और इस तरह बाहर निकलने के उसके फैसले का स्थानीय ऑटोमोटिव इकोसिस्टम पर गहरा प्रभाव पड़ा। 

उद्योग विशेषज्ञों ने कंपनी के बाहर निकलने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं। सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह यह थी कि कंपनी अपने उत्पाद और रणनीतियों को भारतीय बाजार की विशिष्ट मांगों को पूरा करने के लिए अलाइन (संरेखित) करने में नाकाम रही। जबकि फोर्ड ने इंजन की पावर और परफॉर्मेंस पर ध्यान केंद्रित किया है, भारत में लोग हमेशा ईंधन दक्षता (माइलेज) और कार की कीमत पर विचार करते रहे हैं। उपभोक्ता की अपेक्षा और उत्पाद की पेशकश के बीच इस बेमेल ने, फोर्ड की घटती बाजार हिस्सेदारी में योगदान दिया।

Ford Electric Car - फोटो : Ford
एक और कारक जिसने फोर्ड की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया वह था उत्पाद विविधता की कमी। मारुति सुजुकी, ह्यूंदै और टाटा मोटर्स जैसे प्रतिस्पर्धियों के उलट, जिनके पास कई विविध मॉडल थे, फोर्ड लंबे समय तक सिर्फ एक या दो मॉडलों पर निर्भर रहा। इससे फोर्ड में खुद इनोवेशन (नवाचार) और ऑप्शन (विकल्प) की कमी होगी। इसलिए कंपनी को ऐसे गतिशील और बदलते बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना मुश्किल है।
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भारत में फोर्ड का मामला किसी भी वैश्विक वाहन निर्माता के लिए चेतावनी भरा उदाहरण है, जो उभरते बाजारों में एंट्री करने की कोशिश करता है। यह बताता है कि स्थानीय उपभोक्ता की पसंद को समझना, उसके अनुसार उत्पाद पेशकशों को अनुकूलित करना और उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना कितना महत्वपूर्ण है। फोर्ड की अनुपस्थिति ने प्रतिद्वंद्वी वाहन निर्माताओं के लिए ज्यादा अवसर खोले होंगे। हालांकि, इसने भारतीय बाजार में परिचालन से जुड़ी चुनौतियों और जोखिमों पर भी रोशनी डाला।

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