ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में थोक बिक्री में 1 प्रतिशत और खुदरा बिक्री में 3 प्रतिशत की मामूली साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। सामान्य चुनावों से पहले बुनियादी ढांचा गतिविधियों में मंदी के कारण थोक बिक्री में 4 प्रतिशत की गिरावट के साथ H1 FY24 में देखी गई बढ़ोतरी कम हो गई थी। ICRA लिमिटेड एक भारतीय स्वतंत्र और पेशेवर निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है।
ICRA रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख, किंजल शाह ने कहा, "वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2023 में मात्रा और टनेज दोनों के मामले में बहुत तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिससे आधार बड़ा हुआ। घरेलू सीवी (कमर्शियल व्हीकल) मात्रा बढ़ोतरी की रफ्तार वित्त वर्ष 2024 में धीमी हो गई। और आम चुनावों की पृष्ठभूमि में कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि में अस्थायी मंदी के बीच वित्त वर्ष 2025 में घटने की उम्मीद है। फिर भी, रिप्लेसमेंट की मांग स्वस्थ बनी रहेगी (मुख्य रूप से पुराने वाहनों के कारण) और निकट से मध्यम अवधि में सीवी मात्रा का समर्थन करने की उम्मीद है। घरेलू सीवी उद्योग के लिए दीर्घकालिक विकास चालक बरकरार हैं। जैसे बुनियादी ढांचा विकास में निरंतर जोर (अंतरिम बजटीय आवंटन में बढ़ोतरी से स्पष्ट है), खनन गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी और सड़कों/राजमार्ग संपर्क में सुधार।"
ICRA को उम्मीद है कि कम मात्रा और ज्यादा प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण दबावों के कारण वित्त वर्ष 2025 में घरेलू सीवी OEM1 के परिचालन लाभ मार्जिन (OPM) में मामूली गिरावट आकर 8.5 प्रतिशत - 9.5 प्रतिशत हो जाएगा।
उद्योग के लिए पूंजीगत व्यय और निवेश वित्त वर्ष 2024 में 3,700 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 5,900 करोड़ रुपये होने की संभावना है। मुख्यतः उत्पाद विकास, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस से संबंधित पूंजीगत व्यय के लिए।
ICRA के एक बयान में उल्लेख किया गया है, "पहले कुछ महीनों में, उच्च आधार प्रभाव और बुनियादी ढांचा गतिविधियों पर आम चुनावों के प्रभाव को देखते हुए, सीवी उद्योग के विभिन्न उप-खंडों में, मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहन (एम एंड एचसीवी) (ट्रक) मात्रा वित्त वर्ष 2025 में 4-7 प्रतिशत सालाना घटने की उम्मीद है। घरेलू हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी) (ट्रक) थोक बिक्री मात्रा वित्त वर्ष 2025 में 5-8 प्रतिशत कम होने की संभावना है, जो उच्च आधार प्रभाव, ई-कॉमर्स में निरंतर मंदी और ई3डब्ल्यू जैसे कारकों के कारण है। सरकारी वाहनों को कबाड़ में डालने से वित्त वर्ष 2025 में राज्य सड़क परिवहन उपक्रमों (एसआरटीयू) से बस सेगमेंट के लिए रिप्लेसमेंट की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जो समग्र आधार पर 2-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का समर्थन करेगा।"