चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
इस सर्वे के मुताबिक, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। इस मामले में भारतीय कार मालिकों ने यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, अमेरिका और बाकी एशियाई देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। चीन पहले नंबर पर है, लेकिन भारत भी उसके काफी करीब है।
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46% भारतीय मुफ्त कनेक्टेड सर्विस के दीवाने
एस एंड पी ग्लोबल की रिपोर्ट बताती है कि चीन में 53 प्रतिशत कार मालिक मुफ्त ट्रायल कनेक्टेड सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि 32 प्रतिशत इसके पेड वर्जन को लेने के इच्छुक हैं। वहीं, भारत में 46 प्रतिशत लोग मुफ्त फीचर का इस्तेमाल कर रहे हैं। और दिलचस्प बात यह है कि 33 प्रतिशत लोग इसके सब्सक्रिप्शन को लेने की भी इच्छा रखते हैं, जो चीन से थोड़ा ज्यादा है। अमेरिका के बाद भारत दूसरे नंबर पर है जहां सबसे ज्यादा लोग कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी के पेड वर्जन को लेने के लिए तैयार हैं, यहां यह आंकड़ा 35 प्रतिशत है।
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सब्सक्रिप्शन नहीं लेने की वजह - कीमत और मोबाइल एप
2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा लोग ऐसे हैं जो किसी भी कनेक्टेड कार सर्विस का सब्सक्रिप्शन नहीं लेना चाहते। इसके पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं। पहली, इसकी कीमत या सब्सक्रिप्शन मॉडल और दूसरी, वही सुविधाएं स्मार्टफोन एप में पहले से मिल जाना। हैरानी की बात तो यह है कि हर पांच में से एक ग्राहक ने इसलिए कनेक्टेड सर्विस नहीं ली क्योंकि उसे इस तकनीक के बारे में जानकारी ही नहीं थी।
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डाटा प्राइवेसी को लेकर चिंताएं
कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी के साथ सबसे बड़ा सवाल है डाटा गोपनीयता। इसमें पारदर्शिता की कमी और डाटा की सुरक्षा को लेकर उद्योग जगत को अभी काफी काम करना बाकी है। ग्राहकों का ड्राइविंग डेटा - जैसे लोकेशन और गाड़ी चलाने की आदतें गलत हाथों में जाकर दुरुपयोग हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार और कंपनियां कड़े डाटा संरक्षण नियम बनाएं।
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जानकारी की कमी से भरोसा नहीं बन पा रहा
कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी की पूरी जानकारी ना होना भी ग्राहकों में विश्वास की कमी की एक वजह है। कार खरीदते वक्त लोग अक्सर इन सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं देते। एस एंड पी ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, कनेक्टेड सर्विसेज के लिए पैसे देने वालों की संख्या 2024 के 86 प्रतिशत से घटकर 2025 में सिर्फ 68 प्रतिशत रह गई है। यह दर्शाता है कि लोगों में जागरूकता और भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है।
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